जलपाईगुडी। पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी में भाजपा सांसद खगेन मुर्मू पर जानलेवा हमला किया गया। जानकारी के मुताबिक, ये हमला तब किया गया जब से बाढ़ प्रभावित इलाके में राहत कार्य में शामिल होने के लिए गए थे। इस भाजपा नेताओं ने टीएमसी के कार्यकर्ताओं पर हमले का आरोप लगाया है। पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी में भाजपा सांसद खगेन मुर्मू पर जानलेवा हमला किया है। वहीं इसे लेकर भाजपा नेता अमित मालवीय ने टीएमसी पर आरोप है, एक्स पर एक पोस्ट में उन्होंने लिखा- बंगाल में टीएमसी का जंगलराज! उत्तरी मालदा से दो बार सांसद रहे और एक सम्मानित आदिवासी नेता, भाजपा सांसद खगेन मुर्मू पर टीएमसी के गुंडों ने उस समय हमला किया जब वे जलपाईगुड़ी के दुआर्स क्षेत्र के नागराकाटा में विनाशकारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन के बाद राहत और बचाव कार्यों में मदद करने जा रहे थे। अमित मालवीय ने अपने पोस्ट में आगे लिखा- जब ममता बनर्जी अपने कोलकाता कार्निवल में नाच रही थीं, तब टीएमसी और राज्य प्रशासन गायब था। जो लोग वास्तव में लोगों की मदद कर रहे थे, भाजपा नेता और कार्यकर्ता, उन पर राहत कार्य करने के लिए हमला किया जा रहा है। यह टीएमसी का बंगाल है, जहां क्रूरता का बोलबाला है और दया की सजा। वहीं पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर एक पोस्ट में इस घटना को लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने लिखा- ममता बनर्जी पूरी तरह से दहशत में हैं। उन्हें (काफी देर से) एहसास हुआ है कि पश्चिम बंगाल की जनता ने उनके श्सेलिब्रिटीज के साथ कार्निवल में नाचनेश् के अमानवीय कृत्य को उस समय नफरत की नजर से देखा है जब उत्तर बंगाल बाढ़ और भूस्खलन से जूझ रहा था, जिसमें कई लोगों की जान चली गई और हजारों लोग बेघर हो गए।

देवबंद में UGC के नए कानून के खिलाफ प्रदर्शन, राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन
देवबंद (सहारनपुर): विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की नई नीतियों और प्रस्तावित कानून को लेकर देवबंद में असंतोष देखने को मिला। मंगलवार को सवर्ण समाज से जुड़े लोगों ने श्री मां त्रिपुर बाला सुंदरी देवी मंदिर, देवीकुंड से विरोध रैली निकालते हुए देवबंद उपजिलाधिकारी कार्यालय तक मार्च किया और राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि UGC का नया कानून उच्च शिक्षा व्यवस्था में संतुलन को बिगाड़ सकता है और इससे विभिन्न सामाजिक वर्गों के बीच वैचारिक टकराव की स्थिति बन सकती है। उनका कहना था कि यह नीति छात्रों के व्यापक हितों के अनुरूप नहीं है और इससे शिक्षा संस्थानों में अविश्वास का माहौल पैदा होने





