नयी दिल्ली- उच्चतम न्यायालय ने गुरुवार को राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद की कक्षा आठ की सामाजिक विज्ञान की उस पाठ्यपुस्तक के पुनर्मुद्रण और डिजिटल प्रसार पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया है, जिसमें न्यायपालिका में भ्रष्टाचार का संदर्भ दिया गया था। न्यायालय ने प्रचलन में मौजूद किताबों की प्रतियों को तुरंत जब्त करने का निर्देश दिया और इस संबंध में दो सप्ताह के भीतर अनुपालन रिपोर्ट मांगी। न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि यह एनसीईआरटी के निदेशक और उन सभी स्कूलों के प्रधानाचार्यों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी होगी जहां यह किताब पहुंची है। उन्हें अपने परिसर में मौजूद किताब की सभी प्रतियों को तुरंत जब्त कर सील करना होगा। शीर्ष अदालत ने यह भी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि संबंधित पुस्तक के आधार पर छात्रों को कोई निर्देश या शिक्षा न दी जाए। सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को इस आदेश का पालन करने और दो सप्ताह के भीतर रिपोर्ट भेजने को कहा गया है।

सरधना के मंच से खुला पुराना हिसाब, पश्चिमी यूपी सियासत फिर क्यों उबल रही है?
पश्चिमी यूपी में सरधना राजनीतिक विवाद अब फुसफुसाहट नहीं रही, खुली बोली बन चुकी है। 29 मार्च के सकौती कार्यक्रम ने यह साफ कर दिया कि 2027 का रास्ता सिर्फ भाषणों से नहीं, जातीय भरोसे, पुराने अपमान और नए गठजोड़ों से तय होगा। मंच पर महाराजा सूरजमल की प्रतिमा थी, लेकिन सियासत की असलियत उस वक्त खुली जब संजीव बालियान ने अपनी हार का हिसाब “सूद व ब्याज समेत” लौटाने की बात कही। सकौती का कार्यक्रम ऊपर से देखें तो जाट समाज के पूर्वज वीर शिरोमणि महाराजा सूरजमल को श्रद्धांजलि का आयोजन था। मगर उसी मंच ने पश्चिमी यूपी की सियासत का तापमान अचानक बढ़ा दिया। पंजाब के सीएम भगवंत





