नयी दिल्ली- उच्चतम न्यायालय ने गुरुवार को राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद की कक्षा आठ की सामाजिक विज्ञान की उस पाठ्यपुस्तक के पुनर्मुद्रण और डिजिटल प्रसार पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया है, जिसमें न्यायपालिका में भ्रष्टाचार का संदर्भ दिया गया था। न्यायालय ने प्रचलन में मौजूद किताबों की प्रतियों को तुरंत जब्त करने का निर्देश दिया और इस संबंध में दो सप्ताह के भीतर अनुपालन रिपोर्ट मांगी। न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि यह एनसीईआरटी के निदेशक और उन सभी स्कूलों के प्रधानाचार्यों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी होगी जहां यह किताब पहुंची है। उन्हें अपने परिसर में मौजूद किताब की सभी प्रतियों को तुरंत जब्त कर सील करना होगा। शीर्ष अदालत ने यह भी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि संबंधित पुस्तक के आधार पर छात्रों को कोई निर्देश या शिक्षा न दी जाए। सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को इस आदेश का पालन करने और दो सप्ताह के भीतर रिपोर्ट भेजने को कहा गया है।

सरधना पर जयंत का दांव, BJP के अंदरूनी समीकरणों से क्यों बढ़ी RLD की उम्मीद?
पश्चिमी यूपी की सियासत में कई बार लड़ाई भाषणों से नहीं, सीटों से पढ़ी जाती है। जयंत चौधरी सरधना सीट पर दावा करें या सिर्फ दबाव बनाएं, दोनों हालतों में एक बात खुल चुकी है—भाजपा की अंदरूनी खींचतान अब निजी नाराज़गी भर नहीं रही। सरधना, सीवेलखास और किठौर का नाम एक साथ उछला है, तो सवाल सिर्फ गठबंधन का नहीं, इलाके में अगुआई किसके हाथ रहेगी, इसका है। सरधना की सीट पर जो चर्चा उठी, उसमें छिपा क्या है रालोद ने गठबंधन के भीतर सरधना के साथ सीवेलखास और किठौर पर भी दावा रखा है। यही वह बिंदु है जहां यह खबर साधारण सीट-समझौते से निकलकर पश्चिमी यूपी की बड़ी





