नयी दिल्ली- उच्चतम न्यायालय ने गुरुवार को राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद की कक्षा आठ की सामाजिक विज्ञान की उस पाठ्यपुस्तक के पुनर्मुद्रण और डिजिटल प्रसार पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया है, जिसमें न्यायपालिका में भ्रष्टाचार का संदर्भ दिया गया था। न्यायालय ने प्रचलन में मौजूद किताबों की प्रतियों को तुरंत जब्त करने का निर्देश दिया और इस संबंध में दो सप्ताह के भीतर अनुपालन रिपोर्ट मांगी। न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि यह एनसीईआरटी के निदेशक और उन सभी स्कूलों के प्रधानाचार्यों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी होगी जहां यह किताब पहुंची है। उन्हें अपने परिसर में मौजूद किताब की सभी प्रतियों को तुरंत जब्त कर सील करना होगा। शीर्ष अदालत ने यह भी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि संबंधित पुस्तक के आधार पर छात्रों को कोई निर्देश या शिक्षा न दी जाए। सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को इस आदेश का पालन करने और दो सप्ताह के भीतर रिपोर्ट भेजने को कहा गया है।

नीम करोली बाबा के चमत्कार: आज भी जिंदा हैं ये कथाएं
नीम करोली बाबा का नाम लेते ही भक्तों के मन में सिर्फ एक संत की छवि नहीं उभरती, बल्कि ऐसी जीवित आस्था जागती है जिसमें करुणा, संरक्षण, सिद्धि और लोक-कल्याण साथ-साथ चलते हैं। नीम करोली बाबा के चमत्कारों से जुड़ी कई कथाएं आज भी भारत ही नहीं, विदेशों तक फैले उनके भक्तों के बीच उतनी ही श्रद्धा से सुनाई जाती हैं, जितनी दशकों पहले सुनाई जाती थीं। आज भी इन कथाओं का असर इतना गहरा क्यों है किसी संत का प्रभाव केवल उनके आश्रमों, मूर्तियों या स्मारकों से नहीं बनता। असली प्रभाव तब बनता है जब उनके बारे में कही जाने वाली कथाएं लोगों के दुःख, डर, भरोसे और जीवन





