नयी दिल्ली- उच्चतम न्यायालय ने गुरुवार को राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद की कक्षा आठ की सामाजिक विज्ञान की उस पाठ्यपुस्तक के पुनर्मुद्रण और डिजिटल प्रसार पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया है, जिसमें न्यायपालिका में भ्रष्टाचार का संदर्भ दिया गया था। न्यायालय ने प्रचलन में मौजूद किताबों की प्रतियों को तुरंत जब्त करने का निर्देश दिया और इस संबंध में दो सप्ताह के भीतर अनुपालन रिपोर्ट मांगी। न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि यह एनसीईआरटी के निदेशक और उन सभी स्कूलों के प्रधानाचार्यों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी होगी जहां यह किताब पहुंची है। उन्हें अपने परिसर में मौजूद किताब की सभी प्रतियों को तुरंत जब्त कर सील करना होगा। शीर्ष अदालत ने यह भी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि संबंधित पुस्तक के आधार पर छात्रों को कोई निर्देश या शिक्षा न दी जाए। सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को इस आदेश का पालन करने और दो सप्ताह के भीतर रिपोर्ट भेजने को कहा गया है।

स्मार्ट प्रीपेड मीटर अनिवार्य नहीं, यूपी उपभोक्ताओं को राहत
स्मार्ट प्रीपेड बिजली मीटर को लेकर केंद्र सरकार ने लोकसभा में बड़ा स्पष्टीकरण दिया है। सरकार ने साफ कहा है कि प्रीपेड स्मार्ट मीटर अनिवार्य नहीं हैं, बल्कि यह उपभोक्ता की पसंद पर आधारित व्यवस्था है। इसका मतलब यह है कि Electricity Act, 2003 के तहत सभी मौजूदा उपभोक्ताओं पर प्रीपेड मीटर थोपना कानून की सीधी शर्त नहीं माना जा सकता। यह जवाब केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने 2 अप्रैल 2026 को लोकसभा में दिया। सवाल नगीना सांसद चंद्रशेखर और नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने उठाया था। सरकार ने अपने लिखित जवाब में कहा कि Section 47(5) के तहत उपभोक्ता यदि प्री-पेमेंट मीटर के जरिए बिजली लेना चाहता




