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शिया धर्मगुरुओ के बेमियादी धरने के बाद सरकार बैकफुट पर

शिया धर्मगुरुओ के बेमियादी धरने के बाद सरकार बैकफुट पर
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मोहर्रम शिया समुदाय का प्रमुख त्योहार है, इसे लेकर कई महीने पहले से तैयारी शुरू हो जाती है। इस वर्ष कोविड 19 की वजह से मार्च के बाद एक भी त्योहार का सार्वजनिक रूप से आयोजन नहीं हुआ। इस बीच मोहर्रम की तिथि करीब आने के बाद शिया समुदाय में बेचैनी बढ़ गयी। शिया धर्मगुरूओं ने सरकार से मिलकर स्थिति स्पष्ट करने को कहा तो सरकार ने कोविड 19 गाइडलाइन्स का हवाला देते हुए मोहर्रम के जुलूसों, मजलिस समेत समस्त आयोजनों पर रोक लगाने का फरमान सुना दिया। सरकार की रोक के बाद शिया समुदाय में रोष फैल गया। शिया धर्मगुरू कल्बे जवाद ने लखनऊ स्थित इमामबाड़ा गुफरान मॉब में प्रेस कांफ्रेंस करके बेमियादी धरने पर बैठने का एलान कर दिया। इसके बाद सरकार बैकफुट पर आ गयी और उत्तर प्रदेश मे मुहर्रम की अज़ादारी पर स्थित को साफ किया। सरकार ने स्पष्ट किया कि घरो मे ताज़िया/ज़री रखने पर कोई प्रतिबंध नही है और ना ही घरो मे मातम मजलिस की कोई रोक टोक है। इमामबाड़ों मे मजलिस कर सकते हैं मगर बिलकुल कम लोगों मे सोशल डिसटेंसिंग और मासक का इस्तेमाल करना होगा। प्रसाद, हिस्सा तबर्रूक केवल सूखा बटेगा। पानी केवल बोतल का होगा। ताज़िया/ ज़री गली चौराहों चौकों पर नही रखे जा सकेगी। कोई जुलूस या सामुहिक कार्यक्रम नहीं होंगे। ताज़िया/ज़री के दफन की प्रक्रिया पर अभी शासन से बातचीत जारी है, इसका समाधान दो-चार दिनों में होने की संभावना जताई जा रही है। इस संबंध मे सभी ज़िलों के डीएम एस एस पी को आदेश भेजे जा चुके हैं कि अपने ज़िले के ज़िम्मेदार लोग इन अधिकारियों से मिल कर सभी बातों को सुनिश्चित कर लें। मुहर्रम के लिए गृह सचिव उत्तर प्रदेश एसके भगत आईपीएस को नोडल अधिकारी के रूप मे समन्वय के लिए संपर्क मे रखा गया है।

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