कांग्रेंस में नेतृत्व के प्रति असंतोष जारी

हाल में 23 वरिष्ठ नेताओं ने सोनिया गांधी को पत्र लिखकर पार्टी के भीतर शीर्ष से लेकर नीचे तक बड़े बदलाव की बात की तो फिर से चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया।

Update: 2020-09-08 06:52 GMT

नई दिल्ली। सचिन पायलट संकट का समाधान भले हो गया हो, लेकिन कांगे्रंस में नेहरू खानदान के वर्चस्व को चुनौती की आवाजें खामोश नहीं हुई हैं। हाल में 23 वरिष्ठ नेताओं ने सोनिया गांधी को पत्र लिखकर पार्टी के भीतर शीर्ष से लेकर नीचे तक बड़े बदलाव की बात की तो फिर से चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया। यह पत्र लिखने वालों में पांच पूर्व मुख्यमंत्री, कांग्रेस वर्किंग कमेटी के कई सदस्य, मौजूदा सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री शामिल हैं।

पत्र में एक तरह से शीर्ष नेतृव पर सवाल उठाते हुए कहा गया है कि पार्टी से लोगों का भरोसा कम हुआ और युवा भी पार्टी से दूर जा चुके हैं। कांग्रेस के लिए पूर्ण-कालिक और प्रभावी नेतृत्व की मांग के साथ मौजूदा नेतृत्व के प्रति अप्रत्यक्ष रूप स े अनास्था भी इसमें दिखी है। इससे साफ है कि कांग्रेस दो धड़े में बंट चुकी है। पत्र में राहुल गांधी पर भी सवाल उठाये गये हैं। इसके चलते ही राहुल की ताजपोशी से पार्टी नेता बचते रहे और सोनिया गांधी कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष चुनी गईं । कांग्रेस में असंतुष्टांें की मौजूदगी पहले से नही है। दिल्ली चुनाव में भाजपा की हार के लिए आम आदमी पार्टी को परोक्ष समर्थन देने पर सांसद मिलिंद देवड़ा ने खुलकर आपत्ति जताई थी। ज्योतिरादित्य सिंधिया कांग्रेस छोड़कर भाजपा में चले गए। सचिन पायलट ने भी खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की थी और उन्हें लेकर पार्टी में जो टकराव शुरू हुआ था वह अभी खामोश है। लोकसभा चुनाव में हार के बाद राहुल गांधी के नेतृत्व पर भी सवाल उठाए शुरू हुए तो अभी भी कांग्रेस में अध्यक्ष पद को लेकर असमंजस की स्थिति है। एक बार फिर अब जनवरी में एआईसीसी की बैठक होने की उम्मीद है। माना जा रहा है कि नेतृत्व के प्रति असंतोष और कांग्रेस अध्यक्ष पर का मुद्दा फिर गर्माएगा।

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