सितम्बर से शुरू होगी सुप्रीमकोर्ट में नियमित फिजिकल हियरिंग!

सुप्रीम कोर्ट के सात जजों की समिति ने अहम फैसला लेते हुए केस की नियमित शारीरिक सुनवाई की अनुशंसा की है।

Update: 2020-08-13 10:25 GMT

नई दिल्ली। वैश्विक महामारी कोरोना संकट के चलते करीब पांच महीने से अदालतों में फिजिकल सुनवाई स्थगित रही। वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई के चलते लाखों की संख्या में वकीलों को आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के सात जजों की समिति ने अहम फैसला लेते हुए केस की नियमित शारीरिक सुनवाई की अनुशंसा की है। इसी के साथ सुप्रीम कोर्ट में वर्चुअल कोर्ट के साथ-साथ ट्रायल बेसिस पर फिजिकल सुनवाई का फैसला लिया गया है।

दो हफ्ते में सर्वोच्च अदालत में फिजिकल सुनवाई शुरू हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट के सात जजों की समिति, जिसमें जस्टिस एनवी रमना, अरुण मिश्रा, आरएफ नरीमन, यूयू ललित, एएम खानविलकर, डीवाई चंद्रचूड़ और एल नागेश्वर राव शामिल हैं, उन्होंने पूरे मामले को लेकर वरिष्ठ मेडिकल विशेषज्ञों से सलाह ली। साथ ही बार काउंसिल के नेताओं मनन कुमार मिश्रा, दुष्यंत दवे और एस जाधव से भी इस बारे में बातचीत की गई। इसके बाद कोर्ट की फिजिकल हियरिंग की सिफारिश की गई है। जानकारी के मुताबिक, एक हाईब्रिड प्रणाली जिसमें लंबे समय से लंबित केस की भौतिक सुनवाई के लिए जरूरी सावधानी के साथ तीन कोर्ट खोलने का फैसला लिया गया है। इसके साथ-साथ वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग के जरिए नए मामलों को सुनवाई जारी रहेगी। सुप्रीम कोर्ट और बार निकायों से जुड़े के सूत्रों ने कहा कि मेडिकल एक्सपर्ट फिजिकल हियरिंग की तत्काल बहाली को लेकर कुछ उलझन में थे और उन्होंने इसको लेकर आगाह भी किया। सूत्रों ने कहा कि उन्होंने जजों को धीरे-धीरे ये ऐसा कदम उठाने की सलाह दी। ऐसा इसलिए क्योंकि इन हालात में कोरोना वायरस के मामले में बढ़ोतरी हो सकती है, क्योंकि सुनवाई को लेकर लोगों को कोर्ट आना होगा। साथ ही प्रवासी श्रमिक भी शहरों में अपने काम पर लौटने की कोशिश करेंगे। जिससे कोरोना के मामले बढ़ सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट में पूरे भारत से याचिकाएं आती हैं, इनमें से महाराष्ट्र समेत दक्षिणी राज्य भी है, जहां कोरोना महामारी अभी भी एक बड़ी चिंता बनी हुई है।

मेडिकल विषेषज्ञों ने यह भी कहा कि अधिकांश जज 60 से अधिक उम्र के हैं इसलिए अदालतों में शारीरिक सुनवाई को फिर से शुरू करने के लिए जल्दबाजी करना बेमानी होगा। लेकिन दवे और जाधव ने अगले सप्ताह तक शारीरिक सुनवाई को फिर से शुरू करने पर जोर दिया, हालांकि मिश्रा ने समिति को बताया कि सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मामलों की शारीरिक सुनवाई की धीमी और धीरे-धीरे बहाली के लिए कम जोखिम वाला दृदृष्टिकोण लेना बेहतर होगा। सभी संबंधितों के विचारों को ध्यान में रखने के बाद, सात जजों की समिति ने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस एसए बोबडे को अपनी सिफारिश सौंप दी। इसमें कहा गया कि तीन कोर्ट रूम में फिजिकल हियरिंग को सीमित किया जाए। केवल लंबे समय से चल रहे पुराने मामलों में सुनवाई की आवश्यकता हो सकती है। हालांकि, एक समय में सीमित संख्या में वकील कोर्ट में उपस्थित हों, इस दौरान सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का भी कड़ाई से पालन किया जाए। समिति ने कहा कि सीजेआई दो हफ्ते के बाद फिजिकल हियरिंग को लेकर सुनवाई की तारीख तय कर सकते हैं। 

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