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कोरोना के खिलाफ जंग में उम्मीद लेकर आई एक और दवा

कोरोना के खिलाफ जंग में उम्मीद लेकर आई एक और दवा
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नयी दिल्ली। कोरोना के खिलाफ जंग के बीच एक और दवा ट्रंप कार्ड के तौर पर देखी जा रही है जो माइल्ड और मॉडरेट पेशेंट को सीवीयर यानी गंभीर बनने से रोकती है. ये दवा अमेरिकन कंपनी रेजीनीरॉन और स्वीटजरलैंड की कंपनी रॉस की मदद से तैयार हुई है और भारत में मार्केटिंग की जिम्मेदारी सिपला कंपनी को सौंपी गई है. पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर इस्तेमाल होने वाली ये दवा रेजीनीरॉन 80 फीसदी पेशेंट को मौत और हॉस्पीटलाइजेशन से बचाने की क्षमता रखती है इसलिए इसे बेहद उपयोगी माना जा रहा है.

दवा की खासियत यह है कि ये माइल्ड और मॉडरेट पेशेंट पर काम करती है और उन्हें सीवियर की कैटेगरी से बचाने का काम करती है. इसका इस्तेमाल 12 साल की उम्र (जिसका वजन मिनिमम 40 किलोग्राम है) से लेकर ज्यादा उम्र के लोगों पर किया जा सकता है. दरअसल ये दो एंडीबॉडी का कॉकटेल है जिसका नाम केसिरविमैब और इंडिविमैब है और इसे कृत्रिम तरीके से तैयार किया जाता है. इस कॉकटेल रूपी इंजेक्शन के इस्तेमाल से ही तुरंत एंटीबॉडी तैयार होने लगता है जो कोरोनावाइरस को निष्क्रिय करने में जुट जाता है. इस तरीके से तैयार की गई दवा को मोनोक्लोनल एंटीबॉडीज कहते हैं.

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