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अफगानिस्तान में हिन्दू व सिखों की जान का खतरा

अफगानिस्तान में हिन्दू व सिखों की जान का खतरा
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नई दिल्ली. तालिबानी हिंसा के बीच अफगानिस्तान में चार गुरुद्वारे बंद होने के साथ वहां सिखों और हिंदुओं पर खतरा मंडरा रहा है। वहां के सिख और हिंदू समुदायों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि इससे पहले कि बहुत देर हो जाए, उन्हें वहां से सुरक्षित निकाल लिया जाए.

इस संबंध में टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक काबुल स्थित गुरुद्वारा करता परवान के अध्यक्ष, गुरनाम सिंह ने कहा कि लगातार बने हुए तालिबान के डर के चलते काबुल में लगभग 150 सिख और हिंदू रह रहे थे. अभी वे सुरक्षित हैं लेकिन कोई नहीं जानता कि हम कब तक सुरक्षित रहेंगे. साथ ही उन्होंने कहा कि वह यहां से जाने में बेहद डर रहे हैं.

गुरनाम ने बताया कि काबुल के पांच में से चार गुरुद्वारे बंद हो चुके हैं और श्री गुरु ग्रंथ साहिब का प्रकाश गुरुद्वारा करता परवान में ही किया जा रहा है. सिंह ने बताया कि बचे हुए सिख और हिंदू भारत नहीं जाना चाहते क्योंकि उनके लिए कोई आर्थिक सुरक्षा नहीं है.

इस बीच, मनमीत सिंह भुल्लर फाउंडेशन, खालसा एड कनाडा और कनाडा के विश्व सिख संगठन (डब्ल्यूएसओ) ने कनाडा सरकार से अफगानिस्तान के अत्यधिक कमजोर सिख और हिंदू अल्पसंख्यकों के लिए एक विशेष कार्यक्रम बनाने का आग्रह किया है.

डब्ल्यूएसओ के कानूनी वकील बलप्रीत सिंह बोपाराई ने कहा कि हम उन लोगों के साथ मजबूत समझौते में हैं जो कनाडा की सरकार से अफगानिस्तान में कमजोर आबादी के लिए सुरक्षा का रास्ता देने के लिए तेजी से कार्य करने के लिए कह रहे हैं. इसमें सिख और हिंदू अल्पसंख्यक शामिल हैं जो लंबे समय से आतंकवादी समूहों के निशाने पर हैं. पूजा स्थलों पर हमलों के कारण बच्चों और वयस्कों की मौत हो गई है. यदि भविष्य में और मौतें हुईं ये सोचने के बजाय, हमें पूछना चाहिए ऐसा कब हो सकता है.

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