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दुनिया की सबसे ताकतवर चुंबक बनाएगी कृत्रिम सूर्य

साल 2025 में इसमें पहली बार प्लाज्मा तैयार किया जाएगा। इस प्रोजेक्ट के तहत प्लाज्मा को 150 मिलियन डिग्री सेल्सियस पर गर्म किया जाएगा। यह सूरज के आंतरिक हिस्से से 10 गुना ज्यादा गर्म होगा।

दुनिया की सबसे ताकतवर चुंबक बनाएगी कृत्रिम सूर्य
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नई दिल्ली। फ्रांस में एक मशीन तैयार होने जा रही ह जो धरती का सूर्य बनेगी। यह मशीन धरती पर फ्यूजन एनर्जी तैयार करेगी। इसमें शामिल एक चुंबक में छिपी हुई है, जिसका नाम सेंट्रल सोलेनायड है। कहा जा रहा है कि यह चुंबक इतनी शक्तिशाली है कि एक हवाई जहाज को ऊपर उठाने में भी सक्षम है। इस मशीन का आगे का निर्माण जनरल एटॉमिक्स में होगा, जिसपर कंपनी करीब 10 सालों से काम कर रही है। इस प्रोजेक्ट में कई देशों का पैसा लगा हुआ है। अमेरिका के कैलिफोर्निया में चल रहे इस प्रोजेक्ट को हाल ही में फ्रांस शिफ्ट किया गया है।

यह एक फ्यूजन जनरेटर है, जिसे आईटीएआर यानि इंटरनेशनल थर्मोन्यूक्लियर एक्सपेरिमेंटल रिएक्टर कहा जाता है। इस मशीन को तैयार करने की प्रक्रिया को दुनिया के सबसे महत्वकांक्षी प्रोजेक्ट्स में से एक कहा जा रहा है। आईटीएआर पहली ऐसी डिवाइस होगी, जो फ्यूजन आधारित बिजली के व्यवसायिक उत्पादन के लिए लंबे समय तक फ्जूयन को बरकरार रख सकेगी और इंटीग्रेटेड टेक्नोलॉजीस, मटेरियल और फिजिक्स का परीक्षण कर सकेगी। कहा जा रहा है कि इस डिवाइस को बनाने में 17 खरब रुपये का खर्च आ रहा है। साथ ही खबर है कि इस मशीन के इस्तेमाल से रेडियोएक्टिव कचरा और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन नहीं होगा। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, टीम ने जानकारी दी है कि प्रयोग सफल होता है, तो महज एक किलो ईंधन से 1500 मेगावाट बिजली तैयार की जा सकेगी। इस प्रोजेक्ट के लिए चीन, यूरोपीय संघ, भारत, कोरिया, रूस, जापान और अमेरिका साथ आए हैं। कई फ्यूजन रिएक्टर्स के मामले में ऐसा हुआ है कि वैज्ञानिक को जरूरत से ज्यादा ऊर्जा तैयार करने का तरीका ही नहीं मिला। आईटीएआर के जरिए इस मुश्किल को दूर करने की कोशिश की जा रही है। यह भी शोध का एक हिस्सा है। जानकारों का कहना है कि साल 2025 में इसमें पहली बार प्लाज्मा तैयार किया जाएगा। इस प्रोजेक्ट के तहत प्लाज्मा को 150 मिलियन डिग्री सेल्सियस पर गर्म किया जाएगा। यह सूरज के आंतरिक हिस्से से 10 गुना ज्यादा गर्म होगा।

आईटीएआर के मिशन में सेंट्रल सोलेनायड का बड़ा योगदान है, क्योंकि यह प्ज्म्त् प्लाज्मा में ताकतवर करंट तैयार करती है। यह फ्यूजन रिएक्शन को आकार देने और नियंत्रित करने में मदद करेगी। तैयार होने के बाद यह चुंबक 59 फीट ऊंची होगी और 14 फीट चैड़ी होगी। इसका वजन भी हजारों टन का होगा। दावा किया जा रहा है कि इस चुंबक की मैग्नेटिक फील्ड धरती की फील्ड से 2 लाख 80 हजार गुना ज्यादा ताकतवर है। इसकी ताकत 13 टेस्ला तक पहुंच सकती है।

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