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अर्मेनिया-अजरबैजान में युद्ध, 23 मरे

अर्मेनिया का दावा है कि उन्होंने अपने एक्शन में अजरबैजान के चार हेलीकॉप्टर, तीन दर्जन टैंक और अन्य सेना के वाहनों को खत्म कर दिया है।

अर्मेनिया-अजरबैजान में युद्ध, 23 मरे
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नई दिल्ली। कभी सोवियत संघ का हिस्‍सा रहे अर्मेनिया और अजरबैजान के बीच जंग शुरू हो चुकी है। इन देशों के बीच नागोरनो-काराबख बॉर्डर के एक हिस्‍से को लेकर विवाद चल रहा था। दोनों देश आखिरी बार साल 2008 में आमने-सामने थे। पिछले दिनों में हालात काफी तनावपूर्ण हो गए हैं और अब जंग जारी है। अब तक 23 जवानों की मौत हो गई लंदन। कभी सोवियत संघ का हिस्‍सा रहे अर्मेनिया और अजरबैजान आखिरकार एक दूसरे से भिड़ गए हैं। इन दोनों देशों के बीच जंग शुरू हो चुकी है। पिछले कई दशकों से इन देशों के बीच नागोरनो-काराबख बॉर्डर के एक हिस्‍से को लेकर विवाद चल रहा था। दोनों देश आखिरी बार साल 2008 में आमने-सामने थे। पिछले दिनों में हालात काफी तनावपूर्ण हो गए हैं और अब जंग जारी है। अब तक 23 जवानों की मौत हो गई है और 100 से ज्‍यादा घायल हैं। बताया जा रहा है कि मृतकों में दो आम नागरिक भी शामिल हैं।

अजरबैजान के राष्ट्रपति ने देश के नाम अपने संबोधन में लोगों को भरोसा दिलाया है कि उनकी सेना को कुछ ही नुकसान हुआ है, लेकिन जंग जारी है। दूसरी ओर अर्मेनिया का दावा है कि उन्होंने अपने एक्शन में अजरबैजान के चार हेलीकॉप्टर, तीन दर्जन टैंक और अन्य सेना के वाहनों को खत्म कर दिया है। नागरनो-काराबख इलाके को लेकर ये पूरा विवाद है, जो कि अब अजरबैजान में पड़ता है लेकिन अभी अर्मेनिया की सेना का यहां पर कब्जा है। स्थानीय मीडिया के मुताबिक, इसी इलाके के पास रिहायशी क्षेत्र में गोलीबारी शुरू हो गई जिसकी वजह से हालात युद्ध के बन गए। अब अजरबैजान ने बॉर्डर से सटे इलाकों में मार्शल लॉ लागू कर दिया है, सड़कों पर सेना चल रही है और चारों ओर टैंक ही टैंक हैं। दूसरी ओर अर्मेनिया का कहना है कि जंग की शुरुआत अजरबैजान ने की है, ऐसे में वो पीछे नहीं हटेंगे। अर्मेनिया और अजरबैजान पड़ोसी देश हैं और एशिया का ही हिस्‍सा हैं। सोवियत संघ में बंटवारे से पहले दोनों देश इसके तहत आते थे। अब दोनों देशों की सीमाएं यूरोप के एकदम करीब हैं। अर्मेनिया की दूरी भारत से करीब चार हजार किलोमीटर है।

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