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त्रिस्तरीय पंचायत चुनावः प्रशासक बैठेंगे या प्रधानों व प्रमुखों को जिम्मेदारी मिलेगी!

चुनाव टलने की सुगबुगाहट के बीच ग्राम पंचायत सचिव विकास निधि पर कुंडली मार कर बैठ गए हैं ताकि चार्ज उनके हाथ में आने के बाद इसकी बंदरबांट की जाए।

त्रिस्तरीय पंचायत चुनावः प्रशासक बैठेंगे या प्रधानों व प्रमुखों को जिम्मेदारी मिलेगी!
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव छह माह तक टालने के अनुमान के बाद शिकायत मिल रही है कि अब इस बात पर मंथन चल रहा है कि बाकी छह माह में पंचायतों की जिम्मेदारी ग्राम प्रधानों को सौंपी जाए या सचिवों को प्रशासक बनाया जाए। माना जा रहा है कि सरकार इस बारे में जल्द ही निर्णय लेगी।

प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायतों के चुनाव को लेकर ऊहापोह की स्थिति बनी हुई है। पंचायतों का पांच साल का कार्यकाल 25 दिसंबर को पूर्ण होने जा है। इसे लेकर तमाम प्रत्याशी हालांकि चुनावी तैयारियों में जुटे हैं, लेकिन असमंजस की स्थिति बरकरार है। सरकारी तैयारियों को देखकर नहीं लगता कि चुनाव समय से होंगे। सूत्रों के अनुसार राज्य निर्वाचन आयोग को चुनावी प्रक्रिया पूरी करने के लिए करीब छह माह की जरूरत होती है। इसके अलावा न्यूनतम चार महीने में भी चुनावी तैयारियां पूरी की जा सकती हैं। इस बार वैश्विक महामारी कोविड-19 के चलते तैयारियां अभी शुरू भी नहीं हो पाई हैं। राज्य सरकार ने अब तक आयोग को चुनाव कराने के संबंध में कोई संकेत नही दिए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सूचना सलाहकार मृत्युंजय कुमार इस आशय के संकेत दे चुके हैं कि सरकार फिलहाल पंचायत चुनाव स्थगित करने पर गंभीरता से विचार कर रही है। माना जा रहा है कि अगले वर्ष मई-जून तक पंचायत चुनाव टल सकते हैं। राज्य निर्वाचन आयुक्त मनोज कुमार ने मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद पहली सितंबर से मतदाता सूची के वृहद पुनरीक्षण के जिलाधिकारियों को जारी आदेश को रद्द कर दिया था।

उत्तर प्रदेश में क्षेत्र पंचायतों का कार्यकाल अगले वर्ष 17 मार्च को और जिला पंचायतों का कार्यकाल 13 जनवरी को समाप्त हो रहा है। अब इस बात को लेकर विवाद चल रहा है कि बाकी छह माह में प्रशासक बैठाए जाएं अथवा ग्राम प्रधानों व अन्य निकाय प्रमुखों को ही बाकी समय कार्यकाल बढाया जाए। ग्राम प्रधान संगठन ने सरकार से मांग की है कि कार्यकाल बढाया जाता है तो प्रधानों को ही आगे जिम्मेदारी सौंपी जाए। फिलहाल शिकायतें मिल रही हैं कि चुनाव टलने की सुगबुगाहट के बीच ग्राम पंचायत सचिव विकास निधि पर कुंडली मार कर बैठ गए हैं ताकि चार्ज उनके हाथ में आने के बाद इसकी बंदरबांट की जाए। इसे लेकर ग्राम प्रधान शिकायतें कर रहे हैं और विकास कार्य बाधित हो रहे हैं।

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