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प्रदूषण के प्रमुख स्रोत को विभाग का अभयदान

60 दिनो मे भी नही हुई टायर फैक्ट्रीयो पर कोई कार्यवाही, प्रदूषण विभाग का दावा चल रहा काम, जिले मे गंभीर वायु प्रदूषण का मुख्य कारण बनी हुई है 29 टायर फैक्ट्रियां

प्रदूषण के प्रमुख स्रोत को विभाग का अभयदान
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मुजफ्फरनगर। जनपद में प्रदूषण का मामला एक बड़ा गंभीर मुद्दा बना हुआ है। प्रदूषण के मामले में यह जनपद यूपी में नम्बर वन की पाजिशन भी हासिल कर चुका है, लेकिन इसके बावजूद भी यहां पर प्रदूषण नियंत्रण विभाग के अफसरों के खिलाफ प्रदूषण रोकने के लिए की जा रही कार्यवाही हास्यास्पद स्थिति उत्पन्न करती हैं। गत दिवस ही प्रदूषण के मामले में एक इंगट निर्माता फैक्ट्री को सील करते हुए लाखों रुपये का जुर्माना लगाने की कार्यवाही कर प्रदूषण विभाग के जिन अफसरों ने वाहवाही लूटने का काम किया, वहीं अफसर जनपद में वायु प्रदूषण का मुख्य स्रोत बनीं 29 टायर फैक्ट्रियों के नाम पर की जाने वाली कार्यवाही को लेकर मौन धारण करने जैसी स्थिति में नजर आते हैं। इसके लिए विभागीय अफसरों का यही कहना है कि सर्वे कराया है, कार्यवाही की जा रही है। यहां तक की 29 फैक्ट्री में गंभीर वायु प्रदूषण की बात खुद विभाग के आरओ भी खुले मंच से स्वीकार कर चुके हैं। लेकिन कार्यवाही के नाम पर कोई कदम नहीं उठाया गया है। प्रदूषण विभाग के अफसरों की मेहरबानी का आलम यह है कि कुछ टायर फैक्ट्रियों में बेखौफ होकर मानकों के विपरीत टायरों को जलाकर तेल निकालने का काम करते हुए गंभीर वायु प्रदूषण फैलाया जा रहा है, जिससे लोगों की जान पर बनी है।


बता दें कि गत बुधवार को प्रदूषण विभाग द्वारा अवैध रूप से संचालित उद्योग को सील कर 13.40 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया। इसमें प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी अंकित सिंह द्वारा बताया गया कि ग्राम हुसैनपुर बोपाडा निकट बेगराजपुर इण्डस्ट्रियल एरिया तहसील खतौली मुजफ्फरनगर में अवैध रूप से संचालित लैड इंगट का उत्पादन करने वाली इकाई मैसर्स रायल स्टार को बोर्ड मुख्यालय लखनऊ से बन्दी आदेश जारी किया गया जिसके अनुपालन में उद्योग मंे स्थापित मशीनरी को विभाग के कार्मिकों द्वारा सील कर दिया गया। पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति के रूप में इस फैक्ट्री पर 13.40 लाख का अर्थदण्ड भी लगाया गया है। उनके इस कथन से स्पष्ट है कि इस फैक्ट्री पर सील लगान का कार्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड मुख्यालय लखनऊ के आदेश पर किया गया है। इससे पहले इस फैक्ट्री के संचालन को लेकर जिला स्तर पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के द्वारा कोई गंभीर कार्यवाही नहीं की गयी। इस फैक्ट्री के अवैध संचालन से न जाने कितने लोगों को नुकसान पहुंच रहा था। ऐसा ही मामला जनपद में बेखौफ चल रही टायर फैक्ट्रियों के प्रति विभागीय अफसरों की हीला हवाली का भी है।


15 जून 2022 को इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के द्वारा एक साधारण सभा का आयोजन किया गया। इसमें मुख्य अतिथि क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अंकित सिंह रहे। उस दौरान टायर फैक्ट्रियों के द्वारा जनपद में फैलाये जा रहे वायु प्रदूषण का मुद्दा भी उठा था। खुद अंकित सिंह ने स्वीकार किया था कि जनपद में करीब 28-29 टायर फैक्ट्रियां हैं, जो गंभीर स्तर पर प्रदूषण का स्रोत बनी हुई हैं। उस मीटिंग में उन्होंने बताया था कि वह इन फैक्ट्रियों का सर्वे कराकर जल्द ही बड़ी कार्यवाही करने जा रहे हैं। इस मीटिंग को 60 दिन से ज्यादा का समय हो चुका है, लेकिन प्रदूषण नियंत्रण को लेकर जिम्मेदार बने इस विभाग के आरओ अंकित सिंह को अपने वादे की याद भी नहीं है। आज भी टायर फैक्ट्रियों के खिलाफ कार्यवाही का इंतजार है। उनके द्वारा इस सम्बंध में बताया गया कि प्रदूषण बोर्ड की टीमों के द्वारा नियमित रूप से क्षेत्र भ्रमण कर अवैध रूप से संचालित तथा प्रदूषण फैलाकर पर्यावरणीय क्षति कारित करने वाले उद्योगो के विरूद्ध नियमानुसार कार्यवाही की जा रही है। उन्होने बताया कि टायर फैक्ट्रियो का सवाल है तो विभाग के स्तर पर गंभीर प्रदूषण फैलाने को लेकर दो इण्डस्ट्रीज पर कार्यावाही की गई है। उसको लेकर जो विभागीय रिपोर्ट आई है, उस पर फैक्ट्रीयो के खिलाफ कार्यवाही की जा रही है।


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