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घरेलू बाजार में बढ़ती कीमतों के बीच सरकार ने प्याज के निर्यात पर लगाई रोक

घरेलू बाजार में बढ़ती कीमतों के बीच  सरकार ने प्याज के निर्यात पर लगाई रोक
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खाने की थाली में सब्जी ना हो तो वह अधूरी लगती है। सब्जियों में प्याज़ को वही स्थान हासिल है जो फलों में आम का है। प्याज के बगैर सब्जी तैयार करना लगभग असंभव है। इन दिनों देश में सब्जियों के लगातार बढ़ते दामों ने सरकार को इसके निर्यात पर पांबदी लगाने को मजबूर कर दिया है। बैंगलुरू रोज और कृषणापुरम प्याज सहित सभी तरह के प्याज पर तुरंत निर्यात की पाबंदी लगाने का नोटिफिकेशन डायरेक्ट्ररेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (DGFT) ने जारी किया है।

आपको बता दें बैंगलुरू रोज और कृष्णापुरम किस्म की प्याज़ के निर्यात पर अभी तक पाबंदी नहीं थी। कृषि विशेषज्ञों की मानें तो प्याज के निर्यात पर पाबंदी की एक बड़ी वजह देश में प्याज की कीमतों का बढ़ना वहीं घरेलू बाजार में कीमतों में गिरावट हो सकती है। कृषि विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि यह समस्या कुछ दिनों के लिए है। यहां यह तथ्य आपकी जानकारी में लाना जरूरी है कि पिछले कुछ महीनों में प्याज का बड़े पैमाने पर निर्यात हुआ है।

इसका असर यह हुआ कि घरेलू बाजार में प्याज की कीमतों ने भारी उछाल मारते हुए 2500 रुपये प्रति क्विंटल पर पहुंच गई। आंकड़ों की बात करें तो भारत की ओर से पिछले साल 44 करोड़ों डॉलर के प्याज निर्यात की तुलना में इस वर्ष अप्रैल-जून के दौरान 19.8 करोड़ डॉलर के प्याज का निर्यात किया गया। बांग्लादेश, मलेशिया, यूएई और श्रीलंका को भारत से सबसे अधिक प्याज निर्यात होता है। भारत के रिटेल बाजारों में इस समय 45 से 50 रुपये किलो बिकने वाला प्याज चंद दिनों पहले तक 15 से ₹20 प्रति किलो की कीमत पर बिक रहा था।

आलम यह है कि एशिया की सबसे बड़ी सब्जी मंडी, दिल्ली की आजादपुर मंडी में प्याज का होलसेल रेट 26 से 37 रुपये किलो है। वहीं, सड़ा प्याज़ भी लोग ₹25 प्रति किलो की कीमत पर खरीदने को मजबूर हैं। कृषि विशेषज्ञों की मानें तो इसकी कीमतों में तेजी के पीछे प्याज की फसल का खराब होना है। आपको बताते चलें कि कर्नाटक में पिछले दिनों हुई भारी बारिश की वजह से प्याज की खड़ी फसल को भारी नुकसान हुआ है। आपको मालूम हो कि पिछले साल सितंबर 2019 में भी सरकार ने प्याज के निर्यात पर प्रतिबंध लगाते हुए प्रति टन प्याज पर 850 डॉलर का एमईपी भी लगा दिया था। तब मांग और आपूर्ति में अंतर होने की वजह से प्याज की कीमतें बहुत ज्यादा बढ़ गई थीं। किसी वस्तु के निर्यात की मिनिमम एक्सपोर्ट प्राइस से नीचे अनुमति नहीं होती है।


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