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टीएमसी ने की महागठबंधन की पेशकश तो कांग्रेस बोली विलय कर लो

भाजपा का कहना है कि तृणमूल कांग्रेस डर गई है। पश्चिम बंगाल भाजपा के अध्यक्ष और लोकसभा सदस्य दिलीप घोष ने कहा कि यह तृणमूल कांग्रेस की हताशा को दर्शाता है।

टीएमसी ने की महागठबंधन की पेशकश तो कांग्रेस बोली विलय कर लो
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कोलकाता। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के आक्रामक तेवरों के बीच तृणमूल कांग्रेस ने तमाम विपक्षी दलों से साथ देने और बिहार की तर्ज पर महागठबंधन बनाने की अपील की। इस पर कांग्रेस पार्टी ने उल्टे टीएमसी को कहा कि उसे कांग्रेस के साथ गठबंधन कर लेना चाहिए।

चुनावी हलचल के बीच बुधवार को वाम मोर्चा और कांग्रेस से भाजपा की सांप्रदायिक एवं विभाजनकारी राजनीति के खिलाफ तृणमूल कांग्रेस ने बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का साथ देने की अपील की है। दोनों दलों ने इस सलाह को खारिज करते हुए कांग्रेस ने तृणमूल कांग्रेस को पेशकश की है कि वह भाजपा के खिलाफ लड़ाई के लिए गठबंधन बनाने के स्थान पर कांग्रेस में विलय कर ले। अगर ममता बनर्जी भाजपा के खिलाफ लड़ने को इच्छुक हैं तो उन्हें कांग्रेस में शामिल हो जाना चाहिए क्योंकि वही सांप्रदायिकता के खिलाफ लड़ाई का एकमात्र देशव्यापी मंच है। ममता बनर्जी ने कांग्रेस से अलग होकर 1998 में तृणमूल कांग्रेस की स्थापना की थी। दूसरी ओर माकपा के वरिष्ठ नेता सुजान चक्रवर्ती ने कहा कि कांग्रेस वाम मोर्चा और कांग्रेस को राज्य में नगण्य राजनीतिक बल करार देने के बाद टीएमसी उनके साथ गठबंधन के लिए बेचैन क्यों है। वाम मोर्चा और कांग्रेस विधानसभा चुनावों में तृणमूल कांग्रेस और भाजपा दोनों को हराएंगे। राज्य में 2016 में हुए विधानसभा चुनावों में कांग्रेस और वाम मोर्चा के गठबंधन को कुल 294 में से 76 सीटें मिली थीं जबि तृणमूल कांग्रेस के 211 सीटें मिली थीं।

भाजपा का कहना है कि तृणमूल कांग्रेस डर गई है। पश्चिम बंगाल भाजपा के अध्यक्ष और लोकसभा सदस्य दिलीप घोष ने कहा कि यह तृणमूल कांग्रेस की हताशा को दर्शाता है। उन्होंने कहा, वे हमसे अकेले नहीं लड़ सकते हैं, इसलिए वे अन्य दलों से मदद मांग रहे हैं। इससे साबित होता है कि भाजपा ही तृणमूल कांग्रेस का एकमात्र विकल्प है। लोकसभा चुनावों में बुरी तरह हारने के बाद कांग्रेस और वाम मोर्चा ने साथ मिलकर विधानसभा चुनाव लड़ने का फैसला लिया है। माकपा नीत वाम मोर्चा को लोकसभा चुनाव में कोई सीट नहीं मिली थी जबकि कांग्रेस को उसकी कुल 42 सीटों में से पश्चिम बंगाल से सिर्फ दो सीटें मिली थीं। वहीं दूसरी ओर भाजपा को 18 सीटें मिली थी जबकि तृणमूल कांग्रेस को 22 सीटें मिली थीं।

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