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कृषि विधेयकों से किसान बंधुआ मजदूर बन जाएंगेः अखिलेश यादव

अखिलेश ने कहा कि सत्ता की खुमारी में रायशुमारी की हत्या कर रही है

कृषि विधेयकों से किसान बंधुआ मजदूर बन जाएंगेः अखिलेश यादव
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लखनऊ। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा सरकार चंदा देने वाले पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने के लिए पहले किसानों के शोषण का बिल लाई और फिर अपने उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने के लिए श्रमिक शोषण का एकतरफा बिल लाई है। उन्हांेने कहा कि इन विधेयकों के लागू होने से किसान बंधुआ मजदूर बनकर रह जाएगा।

समाजवादी पार्टी ने संसद में पारित किए गए किसानों व श्रमिकों के हितों पर आघात करने वाले विधेयकों के खिलाफ प्रदेश भर में जिलाधिकारियों के जरिए राज्यपाल को ज्ञापन भेजे। सपा ने मांग की है कि केंद्र सरकार के कृषि व श्रम कानून प्रदेश में लागू न किए जाएं। सपा ने कृषि से जुड़े बिलों के खिलाफ किसान संगठनों के आंदोलन का समर्थन करते हुए प्रदेश भर में राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारियों को सौंपे गए। ज्ञापन में कहा गया है कि कृकृषि व श्रमिक कानूनों को वापस नहीं लिया गया तो प्रदेश में खेती बर्बाद हो जाएगी, श्रमिक बंधुआ मजदूर बनकर रह जाएंगे। भाजपा सरकार किसानों का मालिकाना हक छीनना चाहती है। न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) सुनिश्चित करने वाली मंडियां धीरे-धीरे खत्म हो जाएंगी। किसानों को फसल का एमएसपी तो दूर, उचित दाम भी नहीं मिलेगा। श्रमिक कानून में बदलाव के बाद तो श्रमिकों का शोषण करने का पूरा अधिकार फैक्टरी मालिकों को मिल जाएगा। नई व्यवस्था में 300 से ज्यादा कर्मचारियों वाली कंपनी सरकार से मंजूरी लिए बिना जब चाहे कर्मचारियों को नौकरी से निकाल बाहर कर सकती है।

अखिलेश यादव ने कहा कि युवा बेरोजगार हैं, किसानों की जमीन पर बड़े-बड़े पूंजीपतियों की नजर है। संसद में बहुराष्ट्रीय कंपनियों व चंद उद्योगपतियों के लिए ही कानून बन रहे हैं। भाजपा सत्ता की खुमारी में रायशुमारी की हत्या करने पर तुल गई है। भाजपा की कुनीतियों से समाज का हर वर्ग परेशान है। छात्रों की पढ़ाई बाधित है, युवाओं पर लाठियां बरसाई जा रही हैं। महिलाओं, बच्चियों के साथ दुष्कर्म की घटनाएं थम नहीं रही हैं। सरकारी स्तर पर भ्रष्टाचार की रोकथाम नहीं है। सचिवालय के अंदर तक से ठगी की साजिशें पनपती हैं। सरकार बढ़ते अपराधों के आगे बेदम है। कृषि व श्रमिकों से जुड़े जनविरोधी कानूनों को लेकर जनता में भारी आक्रोश है। किसान जगह-जगह प्रदर्शन कर रहे हैं।

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