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माफिया सरगना अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ अहमद से पहले भी पत्रकार के भेष में हत्याओं की घटना हुई है- अशोक बालियान

माफिया सरगना अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ अहमद से पहले भी पत्रकार के भेष में हत्याओं की घटना हुई है- अशोक बालियान
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उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में पूर्व सांसद और माफिया सरगना अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ अहमद की कल शनिवार की रात पत्रकार के भेष में आये तीन अपराधियों ने सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी गई है और पुलिस ने उसी समय उनके सरेंडर करने पर उन्हें हिरासत में लिया गया है। इनको पुलिस कस्टडी में मेडिकल के लिए लाया गया था।

अमेरिका में वर्ष 2001 में हमले से ठीक दो दिन पहले अल कायदा ने अफगानिस्तान में पंचशील घाटी के गुरिल्ला नेता अहमद शाह मसूद की कैमरे में छिपे बम में ब्लास्ट करके हत्या कर दी थी। जो लोग पत्रकार बनकर मसूद का इंटरव्यू लेने आए थे, वे उम्र में बहुत कम थे, उन्होंने अपने कैमरे में बम छिपा था। और मौका पाकर उन्होंने बम ब्लास्ट कर दिया था, जिसमे अहमद शाह मसूद मारे गए थे।

उत्तरप्रदेश में वर्ष 2020 में इंटेलिजेंस से रिपोर्ट आई थी कि आतंकवादी पत्रकार के भेष में योगी पर हमला कर सकते हैं। कुछ समय पहले जम्मू कश्मीर में पकडे गए आतंकी तालिब हुसैनसै शाह के मोबाइल से जांच एजेंसियों को काफी फोटो, वीडियो व अन्य सबूत मिले थे। वह पत्रकार बनकर लगातार भाजपा के कार्यक्रमों में शामिल हो रहा था।

दुनिया में माफिया सरगनाओं के विरुद्ध कार्यवाही करना बहुत मुश्किल होता है कोलम्बिया के दुर्दांत माफिया एस्कोबार के ऊपर दुनियाभर में अवैध ड्रग तस्करी, हत्या, बमबारी, रिश्वत देने, रैकेट चलाने और सामूहिक हत्याकांड के केस चल रहे थे, इसको पकड़ने के लिए कोलम्बिया सरकार को अमेरिका और ब्रिटेन से भी मदद लेनी पड़ी थी।

पहले कभी ताजा खबरें हम अखबारों में ढूंढा करते थे और आज, हम कई उपकरणों द्वारा उसे लाइव देख सकते हैं। माफिया सरगना अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ अहमद की हत्या भी दुनिया ने लाइव देखी है। दुनिया के सभी समाज में किसी भी अपराधी के मारे जाने का समाज में सकारात्मक प्रभाव जाता है। अपराधियों को सत्ता का संरक्षण मिलता है, तो डर में गवाह मुकर जाते हैं या उनकी हत्या कर दी जाती है।

प्रयागराज में बसपा विधायक रहे राजूपाल की हत्या के चश्मदीद गवाह उमेश पाल की फरवरी के अंतिम सप्ताह में हत्या कर दी गई थी। अतीक जैसे माफिया जेल में होने के बाद भी खुली सड़क पर निर्दोष लोगों की हत्या करवा रहे थे। इस घटना में चश्मदीद गवाह उमेश पाल की सुरक्षा में लगे दो पुलिसकर्मी की भी हत्या की गयी थी। इस घटना को मुख्यमंत्री योगी ने बेहद गंभीरता से लिया था। उन्होंने विधानसभा में ऐलान किया था कि अपराधियों को मिट्टी में मिला देंगे।

उत्तरप्रदेश को लेकर यह बात सच है कि पुरानी सरकारें अपराधियों को संरक्षण देती थी और योगी सरकार उनको खत्म कर रही है। माफिया अतीक के बेटे असद और शूटर गुलाम के एनकाउंटर माफिया सरगनाओं अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ अहमद की हत्या पर अखिलेश यादव, जयंत चौधरी व ओवैसी वोट बैंक देखकर बयान दे रहे हैं। निश्चित रूप से सवाल उठाना विपक्ष का राजनीतिक धर्म है। लेकिन अपराध और माफिया को राजनीतिक संरक्षण देना कहां की नीति है। धर्म और जाति को हम वोट बैंक का सहारा कब तक बनाएंगे।

हमारी राय में समाज में अपराध व अपराधियों का दमन करना उचित है और योगी सरकार व उसकी पुलिस यही कर रही है।

अशोक बालियान, चेयरमैन,पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन

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