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12 अगस्त को रूस ला रहा कोरोना वैक्सीन

नई दिल्ली। कोरोना वायरस संक्रमण के कारण दुनिया में 2 करोड़ से ज्यादा लोग कोविड-19 पेशेंट के रूप में अब तक सामने आ चुके है। ऐसे में कोरोना वायरस का संक्रमण लगातार बढ़ने और इसके घातक होने को लेकर भी चेतावनी सामने आ रही है।

12 अगस्त को रूस ला रहा कोरोना वैक्सीन
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नई दिल्ली। कोरोना वायरस संक्रमण के कारण दुनिया में 2 करोड़ से ज्यादा लोग कोविड-19 पेशेंट के रूप में अब तक सामने आ चुके है। ऐसे में कोरोना वायरस का संक्रमण लगातार बढ़ने और इसके घातक होने को लेकर भी चेतावनी सामने आ रही है। दुनियाभर में अमेरिका, ब्राजील और भारत अब कोरोना वायरस से सर्वाधिक रूप से प्रभावित देशों में बने हुए है। कोरोना वायरस के संक्रमण की रफ्तार इसी आंकडे से लगायी जा सकती है कि दुनिया में पहले एक करोड़ मरीजों की संख्या होने में 180 दिन लगे और इसके दो करोड़ की संख्या तक पहुंचने में 50 से भी कम दिनों को समय लगा है। यह चिंता का विषय है, लेकिन इसी चिंता के बीच एक अच्छी खबर यह भी आ रही कि रूस ने कोरोना वायरस की पहली वैक्सीन अगले दो दिनों में देने की तैयारी कर ली है। दुनिया को कोरोना वायरस की पहली वैक्सीन 12 अगस्त को मिलने जा रही है।

रूस के स्वास्थ्य मंत्रालय ने यह अधिकारिक ऐलान कर दिया है कि वे इसी हफ्ते वैक्सीन को रजिस्टर करेंगे। यह दुनिया की पहली ऐसी कोरोना वैक्सीन होगी जिसे रेगुलेटरी अप्रूवल मिलेगा। यह वैक्सीन रूस में सभी को दी जाएगी ताकि नोवेल कोरोना वायरस के खिलाफ इम्युनिटी हासिल हो सके। रूस की स्पतनिक न्यूज एजेंसी के अनुसार, इस वैक्सीन से किसी तरह के नुकसान के संकेत नहीं मिले हैं। इस वैक्सीन का बड़े पैमाने पर उत्पादन सितंबर से शुरू हो सकता है। अक्टूबर से पूरे देश में सबको यह टीका लगाने की कवायद शुरू कर दी जाएगी। मास्को के गामलेया रिसर्च इंस्टिट्यूट की बनाई इस वैक्सीन को एडेनोवायरस के आधार पर बनाए गए पार्टिकल्स का यूज करके बनाया गया है। वहां के प्रमुख एलेक्जेंडर गिंट्सबर्ग ने कहा कि जो पार्टिकल्स और आब्जेक्ट्स खुद की कापीज बना सकते हैं, उन्हें जीवित माना जाता है। उनके मुताबिक, वैक्सीन में जो पार्टिकल्स यूज हुए हैं, वे अपनी कापीज नहीं बना सकते। एलेक्जेंडर के मुताबिक, कुछ लोगों को वैक्सीन की डोज दिए जााने पर बुखार आ सकता है। इसके लिए उन्होंने पैरासिटामाॅल के इस्तेमाल की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि टीका लगने के बाद जब इम्युन सिस्टम को पावरफुल बूस्ट मिलता है तो प्राकृतिक रूप से कुछ लोगों को बुखार आ जाता है। वैसे भी टीकाकरण के दौरान कई टीके ऐसे होते हैं, जिनके लगने के बाद बच्चे को तेज बुखार या अकडाहट होती है। ऐसे में रूस की इस वैक्सीन का सिस्टम भी ऐसा ही प्रभाव मानव शरीर पर छोड़ने वाला बताया जा रहा है। सभी कुछ ठीक रहा तो अक्टूबर के बाद से ही रूस यह वैक्सीन दूसरे देशों को भी देने का काम शुरू कर सकता है। इससे दुनिया को इस भयंकर महामारी की त्रासदी पर कंट्रोल करने में काफी मदद मिल सकती है।

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