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यहां 8 तोला सोने के रेजर वाले उस्तरे से होती है सेविंग

कोरोना संकट काल के दौरान लगे लाकडाउन में सर्वाधिक बन्दी की मार झेलने वाले हेयर सैलून संचालकों को अभी तक भी आर्थिक समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। ऐसे ही एक सैलून संचालक ने अपने मंदे धंधे को दोबारा खड़ा करने के लिए अनोखा तरीका अपनाया।

यहां 8 तोला सोने के रेजर वाले उस्तरे से होती है सेविंग
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मुंबई। कोरोना वायरस संक्रमण के दौरान एक साल पहले लाकडाउन के कारण पेश आई आर्थिक चुनौतियों ने कई लोगों को बेरोजगार कर दिया, लेकिन कुछ लोगों ने हिम्मत नहीं हारी और विपरीत परिस्थितियों में भी अपने पिट रहे कारोबार को खड़ा करने के लिए अनोखे उपाय किये। ऐसी ही कहानी दो युवाओं अविनाश और विक्की की है। उन्होंने अपने हौसले से चुनौतियों को बोना साबित किया और नये सफर पर निकल पड़े आज वह अपने नायाब तरीके के कारण दुनिया में मशहूर हो रहे हैं।

पुणे के रहने वाले अविनाश बोरूंदिया और विक्की वाघमारे ने धंधे को दोबारा स्थापित करने के लिए काफी अलग तरकीब निकाला। बताया जा रहा है कि देहूगांव में दोनों रुबाब नामक सैलून चलाते हैं, लेकिन कोरोना महामारी और लाकडाउन के कारण धंधा चौपट हो गया था। चर्चाओं में बने रहने के लिए लोग हमेशा कुछ अलग करने की कोशिश में रहते हैं। कई बार लोगों को इसमें कामयाबी मिलती है, तो कई बार उनकी आलोचना भी होती है। एक ऐसा ही मामला इन दिनों चर्चा में है, जो लोगों को हैरान भी कर रहा है और सोचने पर भी मजबूर कर रहा है। क्योंकि, पुणे के रहने वाले दो शख्स ने लोगों को आकर्षित करने के लिए ऐसा तरकीब निकाला है, जिसके बारे में किसी ने शायद कल्पना तक ना की हो। तो आइए, जानते हैं क्या है पूरा मामला?

दरअसल, कोरोना वायरस का असर लोगों के जीवन पर काफी पड़ा है। कई लोगों पर रोजी-रोटी के संकट तक मंडराने लगे। दुकानें भी काफी दिनों तक बंद रही। जिसके कारण लोगों को काफी परेशानी भी हुई। ऐसे में पुणे के रहने वाले अविनाश बोरूंदिया और विक्की वाघमारे ने धंधे को दोबारा स्थापित करने के लिए काफी अलग तरकीब निकाला। बताया जा रहा है कि देहूगांव में दोनों रुबाब नामक सैलून चलाते हैं, लेकिन कोरोना महामारी और लाकडाउन के कारण धंधा चौपट हो गया था। दोबारा खुलने पर भी ज्यादा लोग सैलून में नहीं पहुंच रहे थे। ऐसे में ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए ऐसी तरकीब निकाली, जिससे दुकान पर हमेशा भीड़ लगी रहती है। रिपोर्ट के अनुसार, अब ये दोनों सोने के उस्तरे से लोगों की सेविंग कर रहे हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, जब इनका धंधा चौपट हो गया तो उन्होंने ग्राहकों को बढ़ाने के लिए कुछ अलग करने का फैसला किया। अविनाश और विक्की ने एक स्टडी में पाया कि पुणे में लोगों को सोने से काफी लगाव है। लिहाजा, उन्होंने फैसला किया कि क्यों ना सोने के उस्तरे से लोगों की सेविंग की जाए। इसके लिए दोनों ने तकरीबन चार लाख रुपए खर्च करके आठ तोले सोने का रेजर बनवाया। दोनों ने बताया कि उस्तरा बनवाने में भी काफी दिक्कतें आई। कई लोग उसे बनाने तक को तैयार नहीं थे। लेकिन, आखिरकार उनका उस्तरा तैयार हो गया और दोनों ने उस रेजर से सेविंग करनी शुरू कर दी। आलम ये है कि इस रेजर से सेविंग करवाने के लिए दुकान पर लोगों की भीड़ लगी रहती है। यहां पर लोगों का नम्बर भी बामुश्किल ही आता है। इस उस्तरे ने ऐसा कमाल किया गया कि आर्थिक समस्याओं से जूझते इस सैलून में अब नोटों की बारिश हो रही है।

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