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आईपीएस सतपाल के दोस्त ने बिहार चुनाव में इस तरह दिया योगदान

मुजफ्फरनगर में एसपी सिटी का पद संभाल रहे 2015 बैच के आईपीएस अफसर सतपाल अंतिल के बैचमेट वाराणसी के एडिशनल एसपी सुकीर्ति माधव मिश्र ने आज बिहार विधानसभा चुनाव में अपने गांव पहुंच कर मतदान किया

आईपीएस सतपाल के दोस्त ने बिहार चुनाव में इस तरह दिया योगदान
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मुजफ्फरनगर। जनपद मुजफ्फरनगर मैं पुलिस अधीक्षक नगर का पद संभाल रहे 2015 बैच के आईपीएस अफसर सतपाल अंतिल के दोस्त और उनके बैचमेट आईपीएस सुकीर्ति माधव मिश्र ने आज हो रहे बिहार विधानसभा के इलेक्शन में अपना योगदान भी दिया है। सुख-दुख को भुला कर ड्यूटी को सर्वोपरि मानने वाले पुलिस महकमे की संवेदना को जाहिर करती अपनी कविता मैं खाकी हूं से एक अलग पहचान बनाने वाले सुकीर्ति माधव मिश्र के आईपीएस अफसर बनने की कहानी भी दिलचस्प है।


मूल रूप से बिहार के जमुई जि‍ले के मलयपुर गांव के रहने वाले सुकीर्ति ने सरकारी स्कूल से अपनी पढ़ाई पूरी की है। उनके पिता कृष्ण कांत मिश्र जूनियर हाईस्कूल में टीचर और मां कविता मिश्र हाउसवाइफ हैं। गांव के सरकारी स्कूल से पढ़ाई करने के बाद सुकीर्ति ने ग्रेजुएशन की पढ़ाई भुवनेश्वर यूनिवर्सिटी से की है। साल 2010 में एम एन आई टी दुर्गापुर से एम बी ए की डिग्री हासिल करके वे कोल इंडिया में मैनेजर पद पर नौकरी कर रहे थे। सुकीर्ति जब तक कोल इंडिया में नौकरी कर रहा थे , तब तक उनके जेहन में आईपीएस अफसर बनने को लेकर कोई ख्वाहिश नहीं थी। लेकिन जब एक दिन उनके पिता जी ने कहा कि उनका सपना है कि सुकीर्ति देश और समाज की सेवा के लिए आईपीएस अफसर बने, अपने पिता की इच्छा को पूरा करने के लिए उन्होंने इस बारे में सोचा। उस दौरान उनको कोल इंडिया में नौकरी करते हुए दो साल हो चुके थे, उनको सिविल सर्विसेस के बारे में ज्यादा पता नहीं था। इसके बावजूद नौकरी करते-करते ही सिविल सर्विसेस की तैयारी शुरू कर दी।


दो साल की कड़ी तैयारी के बाद सुकीर्ति ने वर्ष 2014 में सिविल सर्विसेज का पहला एग्जाम दिया और पहले ही अटेंप्ट में उनका सेलेक्शन हो गया। लेकिन तब रैंकिंग दुरुस्त न होने पर उन्हें आईआरएस कैडर मिला, वे इससे खुश नहीं थे। उन्होंने पिता के सपने को पूरा करने के लिए फिर से तैयारी शूरू कर दी और दूसरे अटेंप्ट में उन्हें आईपीएस कैडर मिल गया। आज वे 2015 बैच के आईपीएस अधिकारी के रूप में सेवा कर रहे हैं। उन्होंने कौल इंडिया में 15 लाख रुपये सालाना की आरामदायक नौकरी को छोड़कर आईपीएस की चुनौती पूर्वक सर्विस को चुना। सबसे ज्यादा चर्चा में वे अपने इस नौकरी छोड़कर पुलिस सर्विस चुनने के कारण नहीं हैं। बल्कि अपने कविता लेखन के हुनर से देशभर में चर्चित हैं। उनकी लिखी कविता 'मैं खाकी हूं' पुलिस महकमे में चर्चा का विषय बन गई है। ट्विवटर पर अब तक कई आईपीएस अफसर इसे शेयर कर चुके हैं। साथ ही आम लोगों की बीच यह कविता काफी पॉपुलर हो चुकी है। जब इनकी कविता जम्‍मू कश्‍मीर के पुलि‍स अधि‍कारी इम्‍ति‍याज हुसैन ने अपने ट्वि‍टर हैंडल पर शेयर की तो साढ़े सात हजार से ज्यादा लोगों ने इसे लाइक किया। उन्होंने अपनी ये कविता हर उस व्यक्त‍ि को समर्पित की, जो कोरोना महामारी जैसे कठ‍िन समय में देश के लिए कुछ कर पा रहा है। सुकीर्ति माधव ने ये कविता मेरठ में अपनी पहली पोस्ट‍िंग के दौरान लिखी थी। लेकिन कोरोना के कारण जब देश में लॉकडाउन लगा और पुलिस सड़को पर उतरी तो ऐसे में उनकी ये कविता काफी पसंद की गई है।

आज बिहार राज्य विधानसभा चुनाव के लिए मतदान हुआ है इस मतदान में आईपीएस अफसर सुकीर्ति माधव मिश्र ने भी अपने गांव के मतदान केंद्र पर जाकर एक जिम्मेदार भारतीय नागरिक का दायित्व निभाते हुए मतदान किया मतदान के बाद उंगली पर लगी सिहाई को प्रदर्शित करते हुए उन्होंने अपनी फोटो ट्विटर हैंडल पर शेयर की है।

सुकीर्ति माधव मिश्र मुजफ्फरनगर जनपद में एसपी सिटी के पद पर तैनात सतपाल अंतिल के बैचमेट हैं और दोनों अफसरों के बीच काफी अच्छी दोस्ती है सतपाल अंतिल समय-समय पर अपने ट्विटर हैंडल के माध्यम से सुकीर्ति माधव मिश्र की कविता और पुलिस अकादमी में उनके साथ बिताए गए विभिन्न यादगार पलों की तस्वीरों को साझा करते रहे हैं।

32 वर्षीय आईपीएस अफसर सुकीर्ति माधव मिश्रा वर्तमान में जनपद वाराणसी में एडिशनल एसपी के पद पर तैनात हैं 31 अक्टूबर को वह इस पद पर पोस्टिंग का 1 साल पूरा कर रहे हैं। उन्होंने वाराणसी में लॉकडाउन के दौरान जहां पुलिस कर्मियों का हौसला बढ़ाने का काम किया वही प्रवासी मजदूरों निराश्रित लोगों और निर्धन परिवारों तक खाकी को एक हमदर्द और मददगार के रूप में पहुंचाने में सफल रहे हैं।

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