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महिला दिवस पर बेरोजगार महिलाओं ने सीएम योगी से मांगी मौत

उत्तर प्रदेश में 9 महीनों से बेरोजगार का होने संकट झेल रही हैं महिला समाख्या की 800 कार्यकत्रियों ने सेवा बहाली को लेकर किया प्रदर्शन, आंदोलन की चेतावनी दी। रोजगार नहीं दिये जाने पर सरकार से मांगी इच्छा मृत्यु

महिला दिवस पर बेरोजगार महिलाओं ने सीएम योगी से मांगी मौत
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मुजफ्फरनगर। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर सरकार से लेकर जिला स्तर पर महिलाओं को स्वावलंबन बनाने के लिए सरकारी योजनाओं का प्रचार प्रसार किये जाने के साथ ही महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए दावे और वादे किये गये, लेकिन डीएम कार्यालय से महिलाओें की आई एक तस्वीर ने महिला सशक्तिकरण के लिए हो रहे सरकारी और सामाजिक दावों की पोल भी खुलती नजर आई। महिला समाख्या कार्यक्रम से जुड़ी इन महिलाओं ने बेरोजगार किये जाने पर रोष प्रकट करते हुए प्रदर्शन किया और सरकार से इच्छा मृत्यु मांगी।

सोमवार को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर मिशन शक्ति अभियान के अन्तर्गत जनपद में महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए अनेक कार्यक्रम हुए। इनमें जहां पुलिस कर्मियों के लिए महिला आदर्श बैरक मिली तो वहीं महिलाओं को त्वरित न्याय दिलाने और पुलिस की मदद के लिए जनपद में तीन रिपोर्टिंग महिला पुलिस चैकियों का भी शुभारम्भ हुआ। कहीं सम्मान और तो कहीं महिलाओं के सशक्त होने केे लिए व्याख्यान हुए, लेकिन डीएम कार्यालय पर एक अलग ही नजारा था। यहां पर पहुंची महिला समाख्या की कार्यकत्रियों ने सरकार ने उनके जीवन यापन का अधिकार बहाल करने की मांग करते हुए प्रदर्शन किया। इस दौरान एक ज्ञापन एडीएम वित्त एवं राजस्व आलोक कुमार को सौंपा गया।


इस अवसर पर प्रदर्शनकारी महिलाओं नेे बताया कि आज महिला दिवस पर सरकार को महिला हितों पर जगाने के लिए महिला समाख्या कार्यक्रम के तहत कार्यरत् 800 कार्यकर्ताओं की सेवा बहाली हेतु मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम ज्ञापन दिया गया। उन्होंने कहा कि महिला समाख्या कार्यक्रमविगत 31 वर्षों से यूपी के 19 जिलों गोरखपुर, मऊ, वाराणसी, बहराईच, सीतापुर, प्रयागराज, चित्रकूट, कौशाम्बी, चन्दौली, मथुरा, बुलन्दशहर, मुजफ्फरनगर, जौनपुर, प्रतापगढ़, शामली, औरैया, सहारनपुर, श्रावस्ती, तथा बलरामपुर में लगभग 20 लाख महिलाओं एवं किशोरियों के बीच संचालित रहा है। महिला समाख्या कार्यक्रम को अन्य सशक्तीकरण कार्यक्रम में समाहित कर दिया गया है, परन्तु 25 जून 2020 से महिला समाख्या कार्यक्रम से जुड़े समस्त 800 कार्यकर्ताओं के भविष्य के बारे में कोई निर्णय न होने की स्थिति में इन परिवारों से जुड़े सदस्यों का जीवन यापन करना कठिन हो रहा है।

बेरोजगार हो जाने की विषम परिस्थितियों में भी महिला समाख्या के कार्यकर्ताओं द्वारा कोरोना जैसे संकट में हिम्मत नहीं हारी। आज बिना किसी मदद के अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाते हुए अपनी मांगों को इन महिलाओं ने जिलाधिकारी के माध्यम से सीधे मुख्यमंत्री तक पहुंचाने हुए उनस से गुहार लगाया जा रहा है कि किसी एक महिला की गलतियों की सजा 800 कार्यकर्ताओं को न मिले और हमारे साथ इंसाफ करते हुए हमारी सेवा को पुनः बहाल किया जाये, जिससे हमारे परिवार खासकर बच्चों का भविष्य अधर में न भटके। हमारी ज्यादातर कार्यकर्ताओं की उम्र 45 आयुसीमा को पार कर गयी है, जिससे वह अन्य संस्थाओं या सरकारी संस्थाओं में नौकरी नहीं पा सकती हैं।


ऐसी स्थितियों में एक मात्र सहारा यही है कि हमारी सेवा को बहाल करते हुए उचित माध्यम के द्वारा जिले स्तर से संचालित किया जाये, जिससे हम सरकारी तंत्र के मजबूत उद्देश्यों में शामिल महिला सशक्तीकरण को जमीनी स्तर तक पहुचा सके। अगर एक गलत फैसले के कारण 800 कार्यकर्ताओं का भविष्य अंधकारमय हो रहा है तो यह सशक्तीकरण मिशन की वास्तव में विफलता होगी। इन महिलाओं ने प्रदर्शन कर सरकार से सवाल करते हुए कहा है कि क्या सरकार 800 महिला कर्मचारियों के परिवारों के भविष्य के बारे में उचित कदम नहीं उठा सकती? अगर नहीं तो फिर सरकार इन 800 कर्मचारियों के परिवार को इच्छा मृत्यु देने का निर्देश जारी कर एक और सशक्तीकरण की ओर कदम बढ़ाया जाये।

प्रदर्शन के दौरान राज्य सरकार से मांग की गयी है कि महिला समाख्या के तहत कार्यरत समस्त कर्मियों जो कि सरकारी तौर पर अनुबंध के आधार पर कार्यरत हैं, उनको उसी अनुबंध के आधार पर दिनांक 26.06.2020 से आगे भी नौकरी पर बहाल किया जाये। अगर शासन सभी कर्मियों की नई नियुक्ति के आधार पर समायोजित करती है तो उसे सभी पात्र कर्मियों को ग्रेच्युटी का भुगतान नियमानुसार कर नई तिथि से पदभार ग्रहण कराते हुए सरकारी अनुबंधित कर्मचारियों के अनुरूप ही मानदेय व अन्य सुविधायें प्रदान किया जायें।

उन्होंने कहा कि समस्या को लेकर कई बार ज्ञापन शासन को प्रस्तुत किया गया था, परन्तु हमारी मांगों पर कोई सुनवाई नहीं हो रही है जिससे समस्त कार्यकर्ताओं बेरोजगार होकर भुखमरी के कगार पर आ गये हैं। बच्चों का भविष्य अंधकारमय हो रहा है। यदि हमारी उपरोक्त माँगे नहीं मानी जाती है तो हम सभी कार्यकर्ता विवश होकर अनिश्चित कालीन धरने पर बैठ सकते हैं। प्रदर्शन में मुख्य रूप से पपीन्दर कौर, बबली रानी, वर्षा रानी सहित अन्य समाख्या कार्यकर्ता शामिल रहीं।

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