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12 साल बादः जनाक्रोश का फिर गवाह बना जीआईसी मैदान

2008 में कांग्रेस विधायक पंकज मलिक पर लाठीचार्ज ने बिगाड़ा था विपक्ष का मिजाज, बसपा सरकार और प्रशासन के खिलाफ जीआईसी मैदान में जुटा था विपक्ष, टिकैत-अजित ने पहंुचकर किया था आंदोलन, डीएम को आधी रात मांगनी पड़ी थी माफी।

12 साल बादः जनाक्रोश का फिर गवाह बना जीआईसी मैदान
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मुजफ्फरनगर। किसी ने सही कहा है कि इतिहास खुद को दोहराता है। आज रालोद के आह्नान पर लोकतंत्र बचाओ आंदोलन के लिए जिस मैदान को चुना गया, उस मैदान का राजनीतिक उलटफेर के लिए पुराना इतिहास रहा है। इसी मैदान पर जब सरकार के खिलाफ जनाक्रोश के बीच विपक्ष का गुस्सा नजर आया तो बरबस ही 12 साल पुराने यहां पर तत्कालीन बसपा सरकार के खिलाफ विपक्ष के एक ऐसे ही आंदोलन की भूली-बिसरी यादें लोगों के जहन में ताजा हो गयी। मामला तब भी लाठीचार्ज का था और आज भी लाठी के सहारे हुए अपमान का गुस्सा सरकार के खिलाफ नजर आया। 12 साल पुराने इस आंदोलन ने सरकार के खिलाफ विपक्ष को मजबूत किया था, उस आंदोलन में किसानों के साथ ही जाट समाज ने बड़ी भूमिका निभाई थी। महेन्द्र सिंह टिकैत और चौधरी अजित सिंह ने इस आंदोलन को बड़ी ताकत दी थी और डीएम को आधी रात विपक्ष के इस मंच पर जाकर माफी मांगनी पड़ी थी।

रालोद उपाध्यक्ष जयंत चौधरी पर योगी सरकार में 4 अक्टूबर को हाथरस जाते समय पुलिस के लाठीचार्ज ने विपक्ष को एक मजबूत मुद्दा देने का काम किया। इस अपमान के कारण आज योगी सरकार के खिलाफ किसानों, मजदूरों, दलितों और जाट समाज के बीच पूरे विपक्ष में गुस्सा बना हुआ है। शहर के जीआईसी मैदान पर रालोद की लोकतंत्र बचाओ रैली इस मैदान से जुड़ी राजनीतिक घटनाक्रमों में एक और अध्याय के रूप में शामिल हो गयी। यह मैदान जनपद के साथ ही देश और प्रदेश की कुछ प्रमुख राजनीतिक यादों का गवाह बनता रहा है। आज जयंत चौधरी के समर्थन में जिस प्रकार से विपक्ष के एकजुट होकर एक मंच पर आने की तस्वीर लोगों के लिए भले ही प्रदेश की राजनीति का कुछ नयापन लग रहा हो, लेकिन जीआईसी का मैदान ऐसा ही एक राजनीतिक घटनाक्रम आज से 12 साल पहले देख चुका है।


इस घटनाक्रम की भूमिका में भी पुलिस का बर्बर लाठीचार्ज था। साल 2007 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर पूर्व सांसद हरेन्द्र मलिक के पुत्र पंकज मलिक ने मुजफ्फरनगर की बघरा सीट से चुनाव लड़ा था। इस चुनाव में पंकज ने रालोद की अनुराधा चौधरी को पराजित किया था। इस चुनाव में राज्य में बसपा की लहर चली और मायावती बहुमत लेकर मुख्मयंत्री बनी थी। बात 2008 की है। जिले के विकास को लेकर तत्कालीन जिलाधिकारी द्वारा कलेक्ट्रेट स्थित जिला पंचायत के सभाकक्ष में जनप्रतिनिधियों की मीटिंग बुलाई गई थी। इसमें कांग्रेस विधायक पंकज मलिक भी अपने समर्थकों के साथ मौजूद थे। जनशिकायतों के निस्तारण को लेकर पंकज मलिक ने बीडीओ बघरा को लेकर शिकायत की। इसी को लेकर विधायक की बीडीओ के साथ डीएम व अन्य बड़े अफसरों के सामने ही तीखी नोकझोंक होने लगी। बीडीओ ने विधायक जी पर टिप्पणी कर दी थी। विधायक जी ने तैश में आकर बीडीओ को थप्पड़ जड़ दिया और उनके समर्थकों ने वहां पर हंगामा शुरू कर दिया था। इसी विवाद को शांत करने के लिए पुलिस ने यहां पर लाठीचार्ज कर दिया था। विधायक पंकज मलिक पर भी लाठी भांजी गई।

जिला प्रशासन के इस रवैये के खिलाफ कांग्रेस ने आंदोलन का बिगुल फूंक दिया था और अगले कुछ दिनों में प्रदेश में एक नया राजनीतिक बवाल इस लाठीचार्ज को लेकर खड़ा हो चुका था। कांग्रेस विधायक पंकज मलिक के अपमान को किसान और जाट समाज का अपमान बताते हुए बालियान खाप और भारतीय किसान यूनियन के मुखिया चौधरी महेन्द्र सिंह टिकैत ने बसपा सकरार के खिलाफ आंदोलन का ऐलान कर रही कांग्रेस का समर्थन दे दिया। इसके बाद रालोद मुखिया चौधरी अजित सिंह ने भी इस आंदोलन में साथ होने का ऐलान कर दिया और फिर प्रदेश की बसपा सरकार के खिलाफ जीआईसी के मैदान पर आज की जयंत चौधरी जैसी ही महापंचायत जोड़ दी गयी। तत्कालीन डीएम और एसएसपी ने जीआईसी मैदान पर पहुंचकर इन नेताओं से वार्ता की और आंदोलन समाप्त करने का आग्रह किया, लेकिन सरकार से टकराव का यह दौर कई दिनों तक चला। मंच पर डीएम व एसएसपी को भी किसानों ने बंधक बना लिया था। अंत में महेन्द्र सिंह टिकैत और अजित सिंह की मौजूदगी में आधी रात डीएम द्वारा माफी मांगे जाने पर यह आंदोलन समाप्त हुआ था। विपक्ष और किसान संगठनों की एकजुटता का इससे भी बड़ा नजारा आज जयंत चौधरी की इस रैली के सहारे जीआईसी के मैदान ने अपने इतिहास के पन्नों में संजोने का काम किया है।

हरेन्द्र मलिक और पंकज मलिक ने बढ़ाया जयंत का जोश

मुजफ्फरनगर। आज से 12 साल पहले जयंत की भांति ही सरकार द्वारा किये गये जुल्म और ज्यादती को लेकर आवाज उठाने वाले पूर्व सांसद हरेन्द्र मलिक और कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष पंकज मलिक ने जयंत के लोकतंत्र बचाओ आह्नान के जोश को बढ़ाने का काम किया। कांग्रेस से इस आंदोलन का समर्थन दिया है। ऐसे में पंकज मलिक दिल्ली से ही पार्टी के सांसद दीपेन्द्र हुडडा और जयंत चौधरी के साथ मुजफ्फरनगर पहुंचे तो मुजफ्फरनगर में रहते हुए पूर्व सांसद हरेन्द्र मलिक ने जीआईसी मैदान की इस रैली के लिए समर्थन जुटाया, वह 12 बजे ही रैली स्थल पर पहुंच चुके थे और योगी सरकार पर जमकर बरसे। कांग्रेस पार्टी के सहारे उन्होंने कहीं ना कहीं रालोद से उस अहसान को भी बराबर करने का काम किया, जोकि 2008 में उनके पुत्र के खिलाफ सरकार की ज्यादती को लेकर आंदोलन में अजित सिंह के कूदने को लेकर उनके साथ जुड़ा था।

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