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भाजपा में एक साल-अंजू अग्रवाल करती रहीं संघर्ष

365 दिन सियासी पैमाने पर कायम रहा हाईटेंशन टैम्परेचर, पालिकाध्यक्ष बोलीं-पीएम मोदी-सीएम योगी के सपने को साकार करने का किया काम, सबका साथ-सबका विकास को बढ़ाया आगे, मुख्यमंत्री आगमन पर मीटिंग में स्थान नहीं मिलने पर छलक उठे थे आंसू, प्रदेश के मुखिया के सामने की थी सम्मान की खातिर हठ

भाजपा में एक साल-अंजू अग्रवाल करती रहीं संघर्ष
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मुजफ्फरनगर। नगरपालिका परिषद् की अध्यक्ष अंजू अग्रवाल को कांग्रेस छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए आज पूरा एक साल हो गया है। इस बीते एक साल में भाजपा में जनप्रतिनिधियों का नजरिया उनके प्रति किसी भी स्तर पर बदला हुआ नजर नहीं आया, बल्कि कई बार तो उनके प्रति किये गये व्यवहार से ऐसा प्रतीता होता रहा, मानो भाजपा अंजू अग्रवाल को अपनी पार्टी का हिस्सा ही नहीं मानती है। इस बीते एक साल के पूरे 365 दिन महिला सशक्तिकरण की एक मिसाल बनी पालिकाध्यक्ष अंजू अग्रवाल भाजपा में सम्मान पाने के लिए संघर्ष करती ही नजर आई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आगमन पर अनदेखी हुई तो उनके आंसू भी छलक उठे थे और वह प्रदेश के मुखिया के सामने ही सम्मान की खातिर हठ कर बैठी थी, इसमें जोे साहस उन्होंने दिखाया, वह शायद ही कोई दूसरा जनप्रतिनिधि कर पाता। भले ही भाजपा के मंच पर भगवा धारण करने के बाद भी अंजू अग्रवाल को उचित सम्मान नहीं मिलने का गिला रहा हो, लेकिन उन्होंने हर मंच पर भाजपा के लोगों को सम्मान देने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी।


साल 2017 में हुए नगरीय निकाय चुनाव में शहर के प्रसि( लाला मूलचन्द सर्राफ परिवार की बहू अंजू अग्रवाल को घर से निकालकर यकायक चुनावी मैदान में उतार दिया गया। कांग्रेस के टिकट पर उन्होंने नगरपालिका परिषद् के चेयरमैन पद पर चुनाव लड़ा। भाजपा की लहर होने के बावजूद भी वह इस चुनाव में 11 हजार से अधिक मतों के अंतर से जीती और भाजपा की सुधा राज शर्मा को पराजित किया। उनकी जीत में वैश्य-मुस्लिम मतों के धु्रवीकरण ने बड़ी भूमिका निभाई। अंजू अग्रवाल की जीत इसलिए भी मायने रखती है कि उनके चुनाव में प्रचार के लिए कोई भी स्टार प्रचारक नहीं आया और न ही किसी बड़े नेता की कोई जनसभा कराई गई। चुनाव जीतने के बाद अंजू अग्रवाल ने राजनीतिक भेदभाव से अलग हटकर सभी के विकास को प्राथमिकता दी और बड़ी उपलब्धियों के साथ शहरी विकास को गति देने का काम किया। इस बीच भाजपा के बड़े नेताओं के साथ उनका विवाद भी चरम पर रहा। उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे और जांच भी हुई, बल्कि अभी तक भी कई जांच उनके खिलाफ चल रही हैं।


ऐसे में 30 सितम्बर 2020 को अंजू अग्रवाल ने कांग्रेस को छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया था। इस दिन पश्चिमी उत्तर प्रदेश के भाजपा अध्यक्ष मोहित बेनिवाल के समक्ष गांधीनगर स्थित भाजपा कार्यालय पर आयोजित समारोह में अंजू अग्रवाल नेे सपरिवार भाजपा की सदस्यता ग्रहण की और विश्वास दिलाया कि वह शहरी के कायाकल्प में पीएम मोदी और सीएम योगी के सबका साथ-सबका विकास के संकल्प को सार्थक बनाने का प्रयास करेंगी। इसके बाद वह तो भाजपा की राजनीतिक गंगोत्री की धारा में पूरे मन और विश्वास के साथ समाहित हो गई, लेकिन उनको लेकर भाजपा के कुछ लोगों के बीच बनी नाराजगी शायद दूर नहीं हो पाई, यही कारण है कि उनको भाजपा के मंच पर उचित सम्मान नहीं मिला, जो हमेशा ही सुर्खियां बना रहा। भाजपा नेता के रूप में बीते इस साल के 365 दिन सम्मान की खातिर अंजू अग्रवाल ने कई बार विरोध जताया, जिसको लेकर सियासी पैमाने पर 360 डिग्री टैम्परेचर बना रहा। हम यहां पर ऐसे पांच मामलों का जिक्र कर रहे है, जिनमें अंजू अग्रवाल की भाजपा के नेताओं और पार्टी के जनप्रतिनिधियों के द्वारा अनदेखी की गई है।

1.कोरोना काल में जिला स्तर पर हुए कामकाज को परखने और समीक्षा करने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मई में जिलों का दौरा शुरू किया था। 17 मई को सीएम योगी मुजफ्फरनगर आये। भाजपा के तमाम बड़े नेताओं ने पुलिस लाइन में हेलीकॉप्टर से उतरे सीएम योगी का पुष्प देकर स्वागत किया। यहां पर पालिकाध्यक्ष अंजू अग्रवाल भी पहुंची, लेकिन सीएम योगी सेे मिलने नहीं दिया गया। उनका वहां पर भाजपा नेताओं ने यह कहते हुए परिचय नहीं होने दिया कि आपको जिला पंचायत के सभाकक्ष में सीएम की मीटिंग में पहुंचना हैं। वह अपने साथ लाये फूलों के गुलदस्ते को लेकर हैलीपेड से कलेक्ट्रेट पहंुच गई। यहां सीएम योगी मीटिंग में पहुंचे तो अंजू अग्रवाल भी अन्दर जाने लगी, लेकिन उनको जाने नहीं दिया गया। अपनी ही पार्टी के नेताओं और पुलिस प्रशासन के अफसरों का बर्ताव देखकर वह भावुक हो गयी और उनकी आंखे भी छलक उठी। उन्होंने इसके खिलाफ आवाज उठाते हुए वहीं पर कुर्सी डालकर धरना शुरू कर दिया। खबरें उड़ी तो अफसरों के हाथ पांव फूल गये और उनको अन्दर जाने दिया गया, लेकिन इसके बाद भी अन्दर मौजूद नेताओं ने उनको उचित सम्मान नहीं दिय, वह कहती हैं कि यह ठेस उनके मन में आज भी है।

2.इसके बाद यूपी विधानसभा चुनाव में जिले के मिजाज को परखने और चुनावी समीक्षा करने के लिए यूपी केे जिलों के दौरे पर निकले भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं यूपी चुनाव प्रभारी राधा मोहन सिंह 29 जून को मुजफ्फरनगर पहुंचे। कई जगह उनका स्वागत हुआ। पार्टी कार्यालय पर उन्होंने भाजपा के जनप्रतिनिधियों के साथ मीटिंग का कार्यक्रम रखा। अंजू अग्रवाल भी कार्यालय पर पहुंची और बुके देकर उनका स्वागत किया। जब वह एक जनप्रतिनिधि के नाते प्रभारी राधा मोहन सिंह की मीटिंग में अन्दर जाने लगी तो उनकी ही पार्टी के नेताओं ने उनको गेट पर रोक दिया। यहां से वह बैरंग लौटी।

3. जिले में केन्द्र और राज्य सरकार की कोरोना काल में लोगों की मदद के लिए चलाई गई पीएम स्वनिधि योजना के साथ ही पीएम आवास योजना शहरी का लाभ वितरण करने और शिलान्यास व लोकार्पण कार्यक्रम में 11 अगस्त को मुजफ्फरनगर आये प्रदेश के नगरीय विकास मंत्री आशुतोष टण्डन गोपाल जी के कार्यक्रम में भी उनको अनदेखा किया गया। टाउनहाल में आयोजित सभा में अंजू अग्रवाल को एक अफसर द्वारा बोलने नहीं दिया। यहां से जिला पंचायत सभाकक्ष में आयोजित कार्यक्रम में पहुंची तो संचालन कर रहे इसी अफसर ने उनको अनदेखा कर विचार रखने के लिए आमंत्रित नहीं किया तो मंत्री आशुतोष टण्डन ने स्वयं उनको आमंत्रण दिया।

4.भाजपा द्वारा यूपी मिशन 2022 के लिए की जा रही तैयारियों के अन्तर्गत भाजपा प्रबु( प्रकोष्ठ द्वारा 18 सितम्बर को आशीर्वाद बैंकट हॉल में आयोजित प्रबु( सम्मेलन में भी उनको आमंत्रित नहीं किया गया।

5.लोक निर्माण विभाग खण्ड प्रथम द्वारा 26 सितम्बर को मुजफ्फरनगर-जानसठ-मीरापुर राज्यमार्ग 12 के फोरलेन निर्माण कार्य का शुभारम्भ कराया गया। जानसठ रोड पर बस स्टैण्ड के पास भव्य समारोह आयोजित किया गया। इसमें भाजपा के सभी बड़े नेता और वरिष्ठ कार्यकर्ता मौजूद रहे, लेकिन इस स्थान से करीब 100-150 मीटर दूर ही पालिकाध्यक्ष अंजू अग्रवाल का आवास होने के बावजूद उनको आमंत्रित नहीं किया गया।

इन सभी मामलों से यही कहा जा सकता है कि अंजू अग्रवाल को भाजपा शायद भायी नहीं। इसके लिए वह कहती हैं कि वह भाजपा की सच्ची सिपाही हैं, उन्होंने मुख्यमंत्री योेगी आदित्यनाथ के शहरी विकास के मिशन को ईमानदारी से आगे बढ़ाने का काम किया है। वह सरकार और पार्टी की सबका साथ सबका विकास की प्राथमिकता को लेकर कार्य कर रही हैं। भाजपा में उनका किसी से मतभेद नहीं है। पार्टी में जो कुछ उनके साथ गलत हुआ, उसके लिए उन्होंने आवाज उठाने का काम किया है। वह एक कार्यकर्ता होने के नाते अपनी बात रखने का अधिकार रखती हैं।

अंजू अग्रवाल के आने से पार्टी मजबूत हुईः विजय शुक्ला

मुजफ्फरनगर। भाजपा के जिलाध्यक्ष विजय शुक्ला का कहना है कि पालिकाध्यक्ष अंजू अग्रवाल के पार्टी में सम्मिलित होने से निश्चित तौर पर पार्टी मजबूत हुई है। पार्टी के कार्यक्रमों और आयोजन में उनकी अनदेखी करने के सवाल पर उन्होंने कहा कि पार्टी की अपनी गाइडलाइन है, उसके अनुसार ही कार्यक्रम में व्यक्ति तय होते हैं। इसमें स्थानीय स्तर पर अनदेखी करने जैसा कुछ नहीं है।


भाजपा जिलाध्यक्ष विजय शुक्ला कहते हैं कि अंजू अग्रवाल के साथ पार्टी खड़ी है। वह पार्टी की समर्पित कार्यकर्ता हैं। वह पार्टी में आई अच्छा लगा, हम चाहते हैं कि सभी लोग हमारी पार्टी में आ जाये। भाजपा को एक बड़ा परिवार बताते हुए उन्होंने कहा कि अंजू अग्रवाल के आने से यहां लाभ मिला। पार्टी सबका साथ सबका विकास के साथ ही सबके विश्वास और सबके प्रयास की नीति पर काम कर रही है।

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