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MUZAFFARNAGAR---कूड़ा घर निर्माण को लेकर मलीरा गांव में तनाव

ग्रामीणों ने रालोद और भाकियू नेताओं के साथ जिला मुख्यालय पहुंचकर एडीएम प्रशासन से की मुलाकात, जताया गहरा आक्रोश, आबादी में ही कूड़ा निस्तारण के लिए आरसीसी सेंटर बनाये जाने को लेकर ग्रामीणों और प्रधान में हुई नोकझौंक, आबादी से बाहर करने की मांग

MUZAFFARNAGAR---कूड़ा घर निर्माण को लेकर मलीरा गांव में तनाव
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मुजफ्फरनगर। स्वच्छ भारत मिशन के अन्तर्गत शहरी क्षेत्रों की तर्ज पर ही गांवों में भी स्वच्छता का वातावरण बनाने के उद्देश्य से निर्मित कराये जाने रिसोर्स रिकवरी सेंटर ;आरसीसीद्ध के निर्माण को लेकर गांव मलीरा के ग्रामीणों में आक्रोश है। आरसीसी सेंटर के लिए जिस स्थान का चयन का निर्माण कार्य प्रारम्भ किया गया है, वो स्थान घनी आबादी में बताया गया है और ग्रामीणों के घर के सामने ही कूड़ा घर बनाये जाने की खबर से उनमें रोष पनप रहा है। आरसीसी सेंटर का निर्माण कार्य रुकवाने के बाद शुक्रवार को ग्रामीण रालोद और भाकियू नेताओं के साथ जिला मुख्यालय पहुंचे और एडीएम प्रशासन से मुलाकात करते हुए आरसीसी सेंटर को आबादी से अलग गांव से बाहर बनवाये जाने की मांग की। रालोद और भाकियू नेताओं ने कहा कि आबादी में यह कूड़ा घर नहीं बनने दिया जायेगा। ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान पर हठधर्मी करने के आरोप लगाते हुए उसके आचरण पर भी नाराजगी जताई।

बता दें कि स्वच्छ भारत मिशन के तहत गांवों को कूड़ा कचरा मुक्त बनाने के लिए जिले के कुछ गांवों में आरआरसी सेंटरों का निर्माण कराये जाने के लिए चयन किया गया था। इसके लिए चयनित गांवों में पैसा आने के बाद आरसीसी सेंटरों का निर्माण कार्य तेजी से किया जा रहा है। इन आरसीसी सेंटरों के शुरू होने से इन गांवों में कूड़ा निस्तारण का कार्य शुरू करा दिया जाएगा। योजना के अनुसार गांवों से एकत्र होना वाला कूड़ा रिक्शा-रेहडों में भरकर आरसीसी सेंटर पर लाया जायेगा, जहां पर इसका प्रबंधन कर निस्तारण कराया जायेगा। इसके लिए चरथावल ब्लाॅक के गांव मलीरा का भी चयन किया गया है। आरोप है कि यहां पर आरसीसी सेंटर के निर्माण के लिए जिस जगह का चयन किया गया है, वहां पर ग्राम प्रधान के द्वारा आरसीसी सेंटर का निर्माण तेजी से कराया जा रहा है, जिसको लेकर तनाव और आक्रोश बना हुआ है।


शुक्रवार को भाकियू टिकैत के ग्राम मलीरा अध्यक्ष आशीष त्यागी के साथ ग्रामीण इस मामले में कूड़ाघर का निर्माण कार्य रोके जाने की मांग को लेकर एडीएम प्रशासन नरेन्द्र बहादुर सिंह से उनके कार्यालय में मिले। रालोद जिलाध्यक्ष संदीप मलिक और भाकियू के युवा मंडल अध्यक्ष एवं जिला पंचायत सदस्य पति विकास शर्मा भी मौजूद रहे। एडीएम को जिलाधिकारी के नाम एक प्रार्थना पत्र दिया गया। इसमें ग्रामीणों ने बताया कि गांव के खसरा नम्बर 824 पर स्वच्छ भारत मिशन के अन्तर्गत आरसीसी सेंटर का निर्माण कराया जा रहा है। आरोप है कि ग्राम प्रधान ने जानबूझकर आबादी के बीच ही भूमि का चयन किया है। इससे यदि यहां पर आरसीसी सेंटर बनेगा तो संक्रामक रोगों के फैलने का खतरा बढ़ जायेगा। पहले भी यहां पर निर्माण कार्य रुकवाया गया, जिसको लेकर प्रधान के साथ ग्रामीणों की नोकझौंक भी हुई थी। फिर से काम चालू करा दिया गया है। ग्रामीणों ने प्रधान पर भी गंभीर आरोप लग ाये और जांच की मांग की है। रालोद और भाकियू नेताओं ने कहा कि ग्रामीणों के हितों को देखते हुए आबादी में यह कूड़ा घर नहीं बनने दिया जायेगा। संदीप मलिक ने एडीएम से आबादी के बाहर करीब 500 मीटर दूर गांव के जंगल में भूमि उपलब्ध होने की बात बताते हुए आरसीसी सेंटर को वहां स्थानांतरित कराये जाने की मांग की है। ग्रामीणों ने इस मामले में मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी शिकायत की है। इस दौरान रालोद जिलाध्यक्ष संदीप मलिक, भाकयिू नेता विकास शर्मा, आशीष त्यागी के साथ मलीरा के रामकिशन शर्मा, मोनू कुमार, ओमपाल सिंह, उपेनद्र त्यागी, बाॅबी त्यागी, राम अवतार, सुरेश च्न्द, पंकज कुमार, संदीप, मनोज कुमार, देवेन्द्र कुमार, अमर कुमार, आदेश कुमार आदि ग्रामीण मौजूद रहे। एडीएम प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि जांच कराकर वो उचित कार्यवाही करेंगे।

घिस्सूखेड़ा और थानाभवन मार्ग का मामला भी उठाया

रालोद जिलाध्यक्ष संदीप मलिक और भाकियू के युवा मंडल अध्यक्ष विकास शर्मा ने एडीएम प्रशासन नरेन्द्र बहादुर सिंह के साथ मुलाकात के दौरान मलीरा में कूड़ा घर निर्माण के मामले में संवेदनशील होकर निर्णय लेने का आग्रह करने के साथ ही चरथावल से ग्राम घिस्सूखेडा और थानाभवन जाने वाले मार्ग की समस्याओं को भी उठाया। नेताओं ने बताया कि घिस्सूखेडा मार्ग पर सड़क करीब दस फीट चैड़ी थी, लेकिन सड़क किनारे नहर होने के कारण यहां पर पटेरा घास काफी खड़ी है। इससे सडक मात्र छह फीट के करीब ही रह गयी है। यहां पर सवेरे ग्रामीण अपने खेतों और छात्र छात्राएं अपने स्कूल एवं काॅलेज की ओर जाते हैं। आवागमन में यह पटेरा घास काफी परेशानी का सबब बनी है। इस घास के काटने पर प्रतिबंध होने के कारण ग्रामीण खुद कोई उपाय नहीं कर सकते हैं। यह सड़क लोक निर्माण विभाग की है और नहर सिंचाई विभाग के अन्तर्गत आती है। ऐसे में रालोद व भाकियू नेताओं ने घास कटवाने की मांग की। साथ ही थानाभवन मार्ग में गहरे गडढों की समस्या के निदान के लिए भी कहा गया। एडीएम ने लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता को निर्देश दिये।

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