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योगीराज-जब गरीब की पीड़ा सुनने को जमीन पर बैठ गये आईएएस सुहास

विकलांगता के अभिशाप को अपने परिश्रम और जुनून से विश्वास में बदलने वाले आईएएस अधिकारी सुहास आज देश के युवाओं के रोल माडल बने हुए हैं।

योगीराज-जब गरीब की पीड़ा सुनने को जमीन पर बैठ गये आईएएस सुहास
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मुजफ्फरनगर। साल 2017 के बाद उत्तर प्रदेश में हुए सत्ता परिवर्तन ने शासन और प्रशासन के कामकाज में बदलाव लाने का काम किया है। योगीराज में कई ऐसे काबिल अफसरों को सरकार ने आगे बढ़ाने का काम किया है, जिन्होंने अपनी कार्यप्रणाली से जनता का विश्वास जीता है। ऐसे ही अफसरों में शामिल हैं गौतमबुद्धनगर के जिलाधिकारी युवा आईएएस सुहास लालिनाकेरे यथिराज, इस आईएएस को यूपी ब्यूरोक्रेसी के साथ जनता के बीच सुहास एलवाई के नाम से पहचाना जाता है। छरहरे बदन के सुहास चट्टान रूपी चुनौती को भी स्वीकारने से पीछे नहीं हटते। आज वह अपनी कार्यप्रणाली के कारण जनता के बीच लोकप्रिय हैं, तो शासन में भी उनका काम बोलता है। वह एक गरीब की समस्या के लिए कितने संवेदनशील हो सकते हैं, यह एक तस्वीर ने साबित करने काम किया है। इस तस्वीर में ये आईएएस धरती पर बैठा, आसपास पुलिस फोर्स के जवान और अफसर खड़े हैं, तो इस आईएएस के सामने अपने तीन मासूम बच्चों को लेकर रोता बिलखता पिता नम आंखों से अपनी फरियाद अपने इस हाकिम को सुना रहा है। इस तस्वीर ने तमाम ब्यूरोक्रेट्स का ध्यान खींचा है, बात सरकार तक भी पहुंची है।

उत्तर प्रदेश में 2017 के बाद से 2020 के तीन साल में अपराध कम हुए या नहीं, यहां पर भाजपा का रामराज आया या नहीं, यह बात तो पक्ष विपक्ष की बहस का मुद्दा हो सकता है, लेकिन इतना तो तय है कि 2017 में यूपी में योगीराज जरूर आया। इस राज परिवर्तन ने यूपी में अफसरशाही को एक नया अंदाज देते हुए जनता की कसौटी पर खरा साबित करने का काम किया है। योगीराज में काम के प्रति दीवाने, कर्मठ और कर्मवीर अफसरों को तरजीह दी गई। यही कारण है कि पहले ही साल से योगीराज में क्राईम से लेकर काम तक हर जगह परिवर्तन दिखा। ऐसे अफसरों में शामिल आईएएस सुहाल एलवाई यूपी के औद्योगिक परिदृश्य में सबसे महत्वपूर्ण जनपद गौतमबु(नगर में जनता का दिल जीतने का काम कर रहे हैं। हाल ही में वह एक फरियादी की फरियाद सुनने के अपने स्टाइल के कारण जनता के बीच चर्चाओं का केन्द्र बने हुए हैं। यह तस्वीर 24 अगस्त 2020 की उनके कार्यालय परिसर की है।


डीएम गौतमबुद्धनगर सुहास एलवाई अपने कार्यालय में बैठकर प्रशासनिक कार्य निपटाने के साथ ही शिकायत व समस्या सुन रहे थे और अफसर भी उनके साथ थे। इसी बीच उनको पता चला कि एक व्यक्ति अपने बच्चों के साथ उनके कार्यालय प्रांगण में धरने पर बैठा है। वह कुर्सी से उठतकर उस व्यक्ति के पास जाते हैं। यह देखने में काफी गरीब लगता है। इस व्यक्ति के सामने उसके तीन बच्चे बैठे हुए थे। डीएम सुहास एलवाई के साथ सीडीओ और पुलिस फोर्स के जवान भी थे। यह व्यक्ति डीएम को देखकर रोने लगा। आईएएस सुहास अचानक ही इस व्यक्ति के सामने जमीन पर बैठ गये और उसकी समस्या पूछी। डीएम का यह अपनापन इस व्यक्ति को और भी भावुक कर गया। उसने बताया कि वह ग्रेटर नोएडा के मारकपुर का निवासी प्रसाद है। उसने साल 2018 में जैसे तैसे एक 50 गज का प्लाट खरीदा और रजिस्ट्री कराकर अपने तीन बच्चों के साथ गुजर बसर शुरू कर दी थी। अब एक महिला अपने साथ कुछ गुण्डों को लेकर आती है और उसका प्लाट अपना बताकर खाली करने की धमकी दे रहे हैं। उसके गुण्डों ने उसका सामान भी बाहर फिकवां दिया है। उसकी और बच्चों की जान को खतरा बना है। डीएम सुहास एलवाई ने उस व्यक्ति को उठाया और उसे अपने आॅफिस में ले गये, वहां संबंधित अफसर को बुलाकर पूरे मामले की रिपोर्ट मांगी और सख्त कार्यवाही के निर्देश दिये। इस व्यक्ति को इंसाफ की उम्मीद जगाकर घर रवाना किया। यह मामला भले ही एक दिन पुराना हो, लेकिन एक हाकिम ने जमीन पर बैठकर इंसानियत को जिन्दा करने का काम करते हुए एसी कल्चर वाली ब्यूरोक्रेसी को आईना दिखाने का काम किया है।

सुहास के विश्वास से जर्रा-जर्रा हुई पहाड़ जैसी चुनौतियां

दिल्ली से लखनऊ तक अपने औद्योगिक विकास के कारण सरकारों की प्लानिंग का हमेशा ही बड़ा हिस्सा रहने वाले यूपी के सबसे महत्वपूर्ण जनपद गौतमबुद्धनगर में प्रशासनिक सिस्टम को सींच रहे आईएएस सुहास एलवाई एक दृढ़ इच्छाशक्ति वाले व्यक्ति हैं। छरहरा बदन, पैर से विकलांगता, पिता की मृत्यु, उनके जीवन में अनेक कष्ट आये, लेकिन उन्होंने हर दुर्बलता से बल लेकर पहाड़ जैसी चुनौतियों को अपने आत्मविश्वास के कारण जर्रा जर्रा कर दिया। वह आगे बढ़ते गये और आज देश व दुनिया जहां उनको एक पैरालम्पिक गोल्ड मेडेलिस्ट खिलाड़ी के रूप में पहचानती है, तो वहीं उत्तर प्रदेश शासन में वह एक कर्मठ आईएएस अधिकारी के रूप में जाने जाते हैं।


मूल रूप से कर्नाटक राज्य के शिमोग के निवासी सुहास एलवाई कम्प्यूटर एजूकेशन में बेचलर है। उन्होंने अपनी सर्विस लाइफ एक साफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में शुरू की। बचपन में वह अपने पिता से काफी प्रभावित रहे। उनके पिता बाॅल टेनिस खेलते थे, तो सुहास को स्कोरर बनना पड़ता था। पिता के इसी खेल ने उनको प्रभावित किया, लेकिन वह कोई लक्ष्य तय नहीं कर पाये। वह आउटडोर बाॅल टेनिस खेलने लगे। इसके साथ ही वह एक अच्छे क्रिकेटर भी हैं और बल्लेबाजी में खूब महारथ हासिल है। खेल पसंद होने के बाद भी वह खेल के क्षेत्र में करियर बनाने की ना सोच सके। 2005 में उनके पिता की मृत्यु ने उनको काफी प्रभावित किया। वह कर्नाटक में एक कंपनी में नौकरी कर रहे थे। इसी बीच उनका रूममेट उनकी प्रेरणा बना। वह सिविल सर्विस की तैयारी कर रहा था। उसका चयन आईपीएस में हुआ तो सुहास को भी एक नई राह नजर आई। सुहास ने अपनी तैयारी शुरू की और पहले ही प्रयास में वह सिविल सर्विस परीक्षा को बे्रक करने में सफल रहे। उनको आईएएस यूपी कैडर मिला। 2007 बैच के आईएएस अफसर सुहास को अपनी पहली पोस्टिंग अगस्त 2009 में ज्वाइंट मजिस्ट्रेट के रूप में आजमगढ़ में मिली। उनको सगडी तहसील में एसडीएम बनाया गया। यहां शुरू हुआ उनका पोस्टिंग का दौर गौतमबु(नगर के डीएम तक जा पहुंचा है।


अपनी 12 पोस्टिंग में वह सात जिलों में कलेक्टर रहे हैं। आजमगढ़ से वह मथुरा में सीडीओ बनाये गये और जुलाई 2011 से सितम्बर 2012 तक महाराजगंज, हाथरस व सोनभद्र जिलों में डीएम रहे। सात दिन के अंतराल के बाद उनको 29 सितम्बर 2019 को जौनपुर में जिलाधिकारी बनाया गया। करीब पांच साल बाद सुहास एलवाई को फिर से आजमगढ़ में प्रशासनिक दायित्व निभाने का अवसर मिला। वह वहां पर जिलाधिकारी बनाये गये। इसके बाद भाजपा सरकार में उनको आजमगढ़ से हटाकर एक्साइज डिपार्टमेंट लखनऊ में विशेष सचिव बना दिया गया। उनकी कार्यकुशलता और कर्मठता को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 25 अक्टूबर 2017 देश की धार्मिक महत्ता में कुंभनगरी के रूप में प्रसिद्ध प्रयागराज का कलेक्टर बनाकर भेजा। यहां से उनको सीएम योगी ने फिर से शासन में भेजा और वह प्लानिंग डिपार्टमेंट लखनऊ में विशेष सचिव बनाये। कोरोना संकट काल में योगीराज में जब प्रशासनिक संकट खड़ा हुआ तो सुहास एलवाई को बड़ी जिम्मेदारी दी गयी। कोरोना वायरस संक्रमण के लगातार बढ़ने के कारण गौतमबुद्धनगर के डीएम बीएन सिंह ने जब मार्च 2020 के अंत में सरकार से अवकाश मांगा तो सीएम योगी ने इस जिले की कमान सुहास को सौंपी और 30 मार्च से आज तक वह गौतमबुद्धनगर को कोरोना संकट से निकालते हुए सरकार की योजनाओं और नीतियों का क्रियान्वयन करने में जुटे हैं।


सुहास एलवाई एक पैर से विकलांग होने के बावजूद पैरालम्पिक बैडमिंटन खिलाड़ी हैं। एक आईएएस और एक खिलाड़ी का उनका यह सफर उनके पिता के देहांत के बाद ही शुरू हुआ। रूममेट से आईएएस बनने की प्रेरणा लेने वाले सुहास ने आईएएस बनने के बाद अपने पिता के सपने को पूरा करने के लिए एक खिलाड़ी बनने का लक्ष्य तय किया। प्रशासनिक और पारिवारिक दायित्व निभाने के बीच ही वह एक अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी बने। सुहास जब डीएम इलाहाबाद थे, उन्होंने इंडोनेशिया में आयोजित पैरालम्पिक एशियन गेम में देश को कांस्य पदक दिलाया था। वह गोल्ड भी दिला चुके हैं। उनको अखिलेश यादव ने यश भारती अवार्ड दिया तो अब योगी आदित्यनाथ उनको 10 लाख रुपये का नगद पुरस्कार देकर सम्मानित कर चुके हैं। विकलांगता के अभिशाप को अपने परिश्रम और जुनून से विश्वास में बदलने वाले आईएएस अधिकारी सुहास आज देश के युवाओं के रोल माडल बने हुए हैं।

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