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लोकतंत्र बचाओ...तुम भी तैयार और हम भी तैयार...आओ मुजफ्फरनगर...कल होगी आरपार

लोकतंत्र बचाओ...तुम भी तैयार और हम भी तैयार...आओ मुजफ्फरनगर...कल होगी आरपार
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मुजफ्फरनगर। हाथरस कांड में साम, दाम, दंड और भेद का हर हथकंडा सियासी तरकश से बाहर नजर आया है। 14 सितम्बर को दबंगों की बर्बरता का शिकार बनी एक शोषित वर्ग की लड़की की मौत के बाद आधी रात को जबरन जलाई चिता की आग भले ही ठण्डी हो गयी हो, लेकिन सरकार की नाक के नीचे प्रशासन के इस बर्बर खेल को लेकर लोगों के दिलों में चिंगारी शायद आज भी तपिश पैदा कर रही है। विपक्ष ने जिस प्रकार से हाथरस के मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री महंत योगी आदित्यनाथ को घेरा है, उसने तमाम तरह से राज्य सरकार के लिए कानून व्यवस्था की चुनौती से निपटने के लिए मुश्किल पैदा कर दी है। हाथरस के बाद अब मुजफ्फरनगर की बारी है। हाथरस की आधी राज की चिता की चिंगारी यहां तक पहुंची है, तो इसके पीछे भी पुलिस की लाठी का जोर ही बड़ा कारण रहा है। अब रालोद के चलो मुजफ्फरनगर से निपटने के लिए जिला पुलिस प्रशासन ने भी कमर कसते हुए जोर का हंगा लगाया है.....आ जाओ मुजफ्फरनगर!

हाथरस कांड में लाठी का जोर तो कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को भी दिखाया गया था। सड़क पर धक्का उनको भी लगा था, पुलिस की बर्बरता को रोकने के लिए कार्यकर्ताओं की ढाल बनकर खाकी के सामने कूदने पड़ी प्रियंगा के गिरेबां भी बदबख्त पुलिस वाले ने ताव में हाथ तो डाला था, लेकिन विपक्ष की ओर से इसका विरोध कुछ ट्वीट और निंदा भरे संदेश तक ही सीमित रहा, लेकिन ऐसा क्या हुआ कि जब हाथरस के लिए बर्बर हुई इसी खाकी के लट्ठ का जोर चौधरी चरण सिंह के पोते की कमर से टकराया तो पुरा विपक्ष शोर शराबा करने सड़क पर उतरने को तैयार हो गया। बात यूपी की सियासत तक हो तो समझी जाती है, लेकिन यहां पर हरियाणा और राजस्थान से सरकार का विरोध करने का तुक क्या है, ये समझ से परे हैं। कुल मिलाकर रालोद के उपाध्यक्ष जयंत चौधरी के लोकतंत्र बचाओ के लिए चलो मुजफ्फरनगर...की हुंकार से निपटने के लिए मुजफ्फरनगर प्रशासन ने भी आओ मुजफ्फरनगर.... का हंगा लगाकर विपक्ष को हिलाने की तैयारी करने का काम किया है। 8 अक्टूबर को राजनीतिक परिदृश्य में एक इतिहास रचने जा रहे मुजफ्फरनगर के राजकीय इण्टर काॅलेज के मैदान पर विपक्ष के जमावड़े को लेकर प्रशासन की और की जा रही तैयारियों को इन्हीं शब्दों में समझा जा सकता है कि .....तुम भी तैयार, हम भी तैयार...आओ मुजफ्फरनगर....कल ही होगी आरपार...!

दरअसल प्रशासन की विपक्षी की 8 अक्टूबर को हुंकार के लिए जो तैयारी है, उसको देखते हुए मुजफ्फरनगर शहर के साथ ही पूरे जिले में एक दहशत सी मची है। मुजफ्फरनगर पुलिस की ओर से शासन से 8 अक्टूबर के लिए जनपद में पांच कम्पनी पीएसी मांगी है। एसएसपी मुजफ्फरनगर अभिषेक यादव की इस डिमांड को पूरा करने में पुलिस मुख्यालय लखनऊ ने कतई देर नहीं लगाई। आईजी कानून व्यवस्था ज्योति नारायण ने पांच कम्पनी पीएसी बल मुजफ्फरनगर के लिए तत्काल उपलब्ध करा दिया। इसके साथ ही सहारनपुर रेंज और मेरठ जोन से भी अतिरिक्त पुलिस बल मुजफ्फरनगर भेजा गया है। इतना ही नहीं एसएसपी अभिषेक यादव ने शासन से इस फोर्स के अलावा तीन कंपनी रैपिड एक्शन फोर्स की भी डिमांड की है। इसमें केन्द्र सरकार से यह फोर्स उपलब्ध कराया जा रहा है। इतनी बड़ी संख्या में मुजफ्फरनगर में पुलिस, पीएसी और अर्द्धसैन्य बल की उपस्थिति से ही लोगों के जहन में कई सवाल उठे हैं। इनमें पहली संभावना यही है कि 8 अक्टूबर को लेकर पुलिस प्रशासन हर स्तर पर निर्णय लेने की अपनी पूरी तैयार कर चुका है।

पुलिस प्रशासन की इस तैयारी से भले ही दबाव बनाने का काम किया जा सकता है, लेकिन जयंत चौधरी को चलो मुजफ्फरनगर....के नारे पर मिले विपक्ष के समर्थन ने जिला प्रशासन ही नहीं यूपी सरकार और भाजपा नेताओं की नींद उड़ा दी है। जयंत अकेले ही लोकतंत्र बचाओ का नारे देकर मुजफ्फरनगर आने की तैयारी में जुटे थे, लेकिन आज उनके साथ समाजवादी पार्टी, कांगे्रस, इंडियन नेशनल लोकदल हरियाणा, जनता दल सेक्युलर, जाट समाज और सभी खाप चौधरी व जाटों के थांबेदार खड़े नजर आ रहे हैं। अब देखना है कि चलो मुजफ्फरनगर...और आओ मुजफ्फरनगर...के इस टकराव के बीच राजनीतिक अखाड़े में कौन सा पहलवान चित्त होता। रालोद के लिहाज से मुजफ्फरनगर जनपद में यह बहुत बड़ा आंदोलन माना जा रहा है। प्रशासन के टकराव से इस आंदोनल की नींव पड़ी और हाथरस की हाॅटनेस ने इसको एक राष्ट्रीय आंदोलन बनाने का काम कर दिखाया है। लोगों में भी 8 अक्टूबर के इस लोकतंत्र बचाओ विरोध प्रदर्शन को लेकर चिंता बनी है। वैसे पुलिस प्रशासन लगातार माहौल ठीक है का विश्वास जगाने के लिए सड़कों पर जनता के बीच उतर रहा है।

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