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हर जाट जयंत के साथ-फिर भी अजित हारे!

2019 के चुनाव में भाकियू की सिसौली ने भी नहीं दिया था अजित का साथ, संजीव को मिले थे ज्यादा वोट, सिसौली के पांच बूथों पर अजित के मुकाबले संजीव को 900 वोट अधिक मिले

हर जाट जयंत के साथ-फिर भी अजित हारे!
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मुजफ्फरनगर। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ जयंत के लोकतंत्र बचाओ आंदोलन में मुजफ्फरनगर और बागपत का हर जाट जीआईसी मैदान पर साथ खड़ा नजर आया। भारतीय किसान यूनियन और जाट समाज के खाप चौधरी व थाम्बेदार के समर्थन ने भी यह साबित करने का काम किया कि हर जाट जयंत के साथ है, लेकिन 2019 के मुजफ्फरनगर लोकसभा चुनाव की बात करें तो आज योगी आदित्यनाथ के खिलाफ चौधरी चरण सिंह की जिस विरासत को लेकर यह आंदोलन शुरू किया गया है, उसी विरासत को दरकिनार करते हुए जाट समाज ने भाजपा और भाजपा के सहारे चुनाव मैदान में उतरे जाट प्रत्याशियों को मुजफ्फरनगर व बागपत सीटों पर तरजीह दी थी। आज जीआईसी के मैदान से यह सवाल भी उठा है कि यदि हर जाट जयंत के साथ, तो मुजफ्फरनगर से अजित और बागपत से जयंत क्यों हारे?

जयंत चौधरी पर हाथरस जाते समय पुलिस द्वारा किये गये लाठीचार्ज को रालोद ने किसानों के सम्मान और पूर्व प्रधानमंत्री स्व. चौधरी चरण सिंह की विरासत व विचारधारा पर हमला बताकर बड़ी सहानुभूति हासिल करते हुए पूरे समाज को एकजुट करने का काम करने में सफलता तो पाई, लेकिन सवाल यही है कि क्या रालोद इस आंदोलन से अपनी राजनीतिक स्तर पर खोई जमीन को वापस पा सकता है। क्योंकि आज जो भीड़ जयंत के पीछे नजर आये, इसमें जाट समाज की भूमिका बड़ी रही। चौधरी महेन्द्र सिंह टिकैत और चौधरी चरण सिंह के बीच पुराना राजनीतिक और सामाजिक गठजोड़ रहा। टिकैत और चरण सिंह ने ना जाने कितनी रातें एक साथ गांव, गरीब और किसानों के बीच हुक्का गुडगुडाते हुए गुजारी हैं।

आज इस गठजोड़ का असर भी जयंत की इस रैली में नजर आया। लोग टिकैत और चरण सिंह के इस समीकरण को प्रदर्शित करने के लिए सिर पर हरी टोपी ओढ़े हाथों में टिकैत और चरण सिंह की तस्वीर लेकर पहुंचे थे। इससे यही साबित किया गया कि किसान बिरादरी के साथ ही हर जाट जयंत के साथ खड़ा है। सिसौली से बालियान खाप के चौधरी नरेश टिकैत के आवास से उठी आवाज ने जाट समाज की सभी खाप के मुखियाओं को भी जयंत के साथ खड़ा करने में भूमिका निभाई, लेकिन यही सिसौली चौधरी चरण सिंह की विरासत के लिए वोटिंग करने में खामोश रालोद के नाम पर खामोशी अख्तियार किये रही।

लोकसभा चुनाव 2019 का परिणाम सदियों तक भारतीय राजनीति के इतिहास में याद किया जाता रहेगा। आज योगी सरकार और भाजपा के खिलाफ जयंत के आंदोलन को बड़ा समर्थन देने वाली सिसौली, लोकसभा चुनाव में चौधरी चरण सिंह की विरासत से मुंह मोड़ चुकी थी। चुनाव परिणाम की बात करें तो सिसौली में डीएवी इण्टर काॅलेज में 148 से 152 नम्बर तक पांच बूथ पर मतदान हुआ था। इन पांचों बूथों पर कुल 4812 वोटर थे, इनमें से 3368 ने अपने वोट डाले। इन वोटरों में से 1205 ने अजित सिंह और 1923 ने डा. संजीव बालियान को वोट दिया। इन दोनों के बीच 3128 वोटों का बंटवारा हुआ। यहां संजीव बालियान ने अजित सिंह से 718 वोट ज्यादा प्राप्त किये। हालांकि सिसौली जिस विधानसभा बुढ़ाना का हिस्सा है, उस सीट पर अजित सिंह ने संजीव बालियान को पराजित किया। अजित ने मुजफ्फरनगर लोकसभा की बुढ़ाना सीट पर 1 लाख 32 हजार 940 वोट पाये, जबकि संजीव को यहां पर 1 लाख 16 हजार 295 वोट मिले। वह इस सीट पर अजित सिंह से 16645 वोटों से पिछड़ने के बावजूद भी चुनाव जीते थे। इस आंकड़े ही समझा जा सकता है कि जाट समाज ने चौधरी चरण सिंह की विरासत को चुनावी बिसात पर कितना सम्मान देने का काम किया है। बुढ़ाना विधानसभा में जाट बाहुल्य गांव होने के कारण इसे राजनीतिक स्तर पर मिनी छपरौली कहा जाता है।

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