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क्या होती है? एक्टापिक प्रेग्नेंसी, ऐसे होंगे लक्षण और पहचान

क्या होती है? एक्टापिक प्रेग्नेंसी, ऐसे होंगे लक्षण और पहचान
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स्त्री रोग विशेषज्ञ बताती हैं कि एक्टापिक प्रेग्नेंसी एक ऐसी गर्भावस्था है, जिसमें शुक्राणु से मिलने अर्थात् फर्टिलाइज होने के बाद अंडा गर्भाशय से बाहर विकसित होता है। हालांकि फर्टिलाइज होने के बाद अंडा गर्भाशय के बाहर नहीं रह सकता है। किसी भी महिला के लिए मां बनना उसके जीवन की सबसे बड़ी खुशी होती है। शादी के बाद हर महिला की इच्छा होती है कि वह मां बने। साथ ही उसका यह कठिन दौर बेहद ही आरामदायक तरीके से बीत जाए। हालांकि, गर्भावस्था में महिला को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इन्हीं में से एक है एक्टापिक प्रेग्नेंसी अर्थात् अस्थानिक गर्भावस्था। यह एक बेहद सीरियस कंडीशन है, जिस पर ध्यान ना दिया जाए तो यह बेहद ही गंभीर रूप धारण कर सकती हैं। तो चलिए विस्तारपूर्वक जानते हैं एक्टापिक प्रेग्नेंसी के बारे में...

क्या होती है एक्टापिक प्रेग्नेंसीः स्त्री रोग विशेषज्ञ बताती हैं कि एक्टापिक प्रेग्नेंसी एक ऐसी गर्भावस्था है, जिसमें शुक्राणु से मिलने अर्थात् फर्टिलाइज होने के बाद अंडा गर्भाशय से बाहर विकसित होता है। हालांकि फर्टिलाइज होने के बाद अंडा गर्भाशय के बाहर नहीं रह सकता है। अगर इसे यूं ही विकसित होने के लिए छोड़ दिया जाए तो यह आसपास के अंगों को भी नुकसान हो सकता है। इसका गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सही समय पर इलाज ना मिलने पर स्त्री की जान भी जा सकती है।

यूं पहचानें लक्षणः डाक्टर कहते हैं कि अगर आपके पीरियड मिस होते हैं तो यह जरूरी है कि आप सबसे पहले एक बार डाक्टर को जरूर दिखाएं। इससे आपको यह पता चल जाएगा कि वास्तव में आप गर्भवती हैं भी या नहीं। इसके अलावा, एक्टापिक प्रेग्नेंसी का संकेत है योनि से रक्तस्त्राव और श्रोणि में दर्द आदि। वहीं, अगर निषेचित अंडे फैलोपियन ट्यूब में बढ़ता रहता है, तो यह ट्यूब के फटने का कारण बन सकता है। इससे पेट के अंदर भारी रक्तस्राव होने की संभावना है। इससे बेहोशी, शाक या फिर जीवन को भी खतरा हो सकता है।

कब दिखाएं डाक्टर कोः स्त्री रोग विशेषज्ञ के अनुसार, अगर आपको कुछ लक्षण नजर आएं तो आपको तुरंत डाक्टर के पास जाना चाहिए। योनि से रक्तस्राव के साथ गंभीर पेट या पैल्विक दर्द, बेहोशी या कंधे का दर्द होने पर डाक्टर से परामर्श लेना चाहिए। वैसे जहां तक बात एक्टापिक प्रेग्नेंसी की है तो इस स्थिति में गर्भपात करवाना ही सबसे सुरक्षित व उचित उपाय माना जाता है।

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