भुगतान से पहले कोई समझौता नहींः राकेश टिकैत

7वें दिन भी अधीक्षण अभियंता कार्यालय पर किसानों का जमावडा, फूंस की कुटिया में राकेश टिकैत ने बितायी रात

Update: 2020-11-03 10:34 GMT

मुजफ्फरनगर। गन्ना बकाया भुगतान सहित अन्य मांगों को लेकर भारतीय किसान यूनियन का आंदोलन आज 7वें दिन भी जारी रहा। यहां नुमाइश कैम्प स्थित अधीक्षण अभियंता विद्युत कार्यालय पर किसान मंगलवार को भी डटे रहे। सोमवार के मुकाबले यहां पर भीड़ कम नजर आयी। इस दौरान भाकियू प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि किसानों का बकाया भुगतान जारी करने से पहले कोई भी समझौता, आश्वासन हमें स्वीकार नहीं है।

बता दें कि किसानों के बकाया गन्ना मूल्य के भुगतान के साथ ही अन्य छह मांगों को लेकर भाकियू द्वारा प्रदेश व्यापी आंदोलन किया जा रहा है। इसी कड़ी में आज भी अधीक्षण अभियंता कार्यालय पर भाकियू का बेमियादी धरना जारी रहा। सोमवार को यहां पर किसानों ने राकेश टिकैत व अन्य किसान नेताओं के ठहरने के लिए फूंस की झोपड़ी बनाई थी। राकेश टिकैत ने किसानों के साथ इसी झोपडी में रात बितायी और सवेरे हुक्के की गुडगुडाहट के साथ धरने की कमान संभाल ली थी। उन्होंने कहा कि हमने जिला प्रशासन को भरपूर समय दिया है। गन्ना मूल्य का बकाया भुगतान 6 नवम्बर तक नहीं किये जाने पर 7 नवम्बर को जनपद का किसान शिव चौक पर महापंचायत करेगा। किसानों से बकाया वसूली के लिए प्रशासन और पुलिस कोई भी समय नहीं देती, लेकिन किसान हर बार आश्वासन पर आश्रित रहकर आंदोलन से पीछे हट जाता है, लेकिन इस बार यह आरपार की लड़ाई है। प्रशासन किसानों पर मुकदमे दर्ज करे, उनको जेल भेजे, पर किसान अपना बकाया भुगतान का पैसा लेकर ही यहां से उठकर अपने घर जायेंगे। उन्होंने किसानों से एकजुट होकर आंदोलन को सफल बनाने का आह्नान किया।


इस आंदोलन के माध्यम से भाकियू ने शासन प्रशासन से 6 प्रमुख मांग की है, जिनमें गन्ने का मूल्य 450 रू कुंतल घोषित करने, किसानों के बकाया गन्ना भुगतान लगभग 8000 करोड़ का भुगतान वापस कराने, न्यूनतम समर्थन मूल्य को कानून बनाने, किसानों के कोल्हू पर फिक्स चार्ज के आधार पर बिल लेने, गन्ना नियंत्रण कानून से ब्याज समाप्त करने की धारा को समाप्त करने और धान के क्रय केंद्र पर किसानों की खरीद की व्यवस्था कराने के साथ ही मक्का व बाजरे के भी क्रय केंद्र खोले जाने की मांग शामिल हैं।

धरने में मुख्य रूप से अनुज बालियान, अर्जुन सिंह, देशपाल सिंह, राजू अहलावत, अशोक घटायन, योगेंद्र सिंह, विपिन मेंहदीयान, आलोक गोयल, बिट्टू ठाकुर, महकार सिंह, श्याम सिंह सैनी, ओमवीर सिंह, गुलशन दतियाना, सतेंद्र नेताजी, नवीन सैनी, बीरसिंह, ज्ञानेश्वर त्यागी, सतेंद्र ठाकुर, चंचल, अनुज बालियान, मुरसलीन, योगेश बालियान, नवीन राठी, मांगेराम त्यागी, बाबू सिंह, रामपाल दरोगा, हरिओम त्यागी, बिट्टू, कुशलवीर सिंह, नोमान, कुलदीप त्यागी, पिंटू बालियान आदि किसान मौजूद रहे।

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