बगावत करने वाले सातों विधायक पार्टी से निलंबित/ सपा को हराने के लिए भाजपा से भी हाथ मिलाना पड़ा तो मिलाएंगेः मायावती

मायावती का कहना है कि उन्हें 2 जून 1995 (गेस्ट हाउस कांड) का केस वापस नहीं लेना चाहिए था। ये उनकी एक बड़ी गलती थी। इसके अलावा उन्हें सपा से भी हाथ नहीं मिलाना चाहिए था।

Update: 2020-10-29 05:51 GMT

नई दिल्ली। 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को रोकने के लिए समाजवादी पार्टी के साथ आई बहुजन समाजवादी पार्टी में सपा की शय पर बसपा के 7 विधायकों के बागी होने के बाद सपा को लेकर मायावती ने तीखे तेवर दिखाते हुए सपा के साथ गठबंधन को अपनी बड़ी भूल करार देते हुए कहा है कि सपा को हराने के लिए उन्हें भाजपा का साथ देना पडा तो देंगे। मायावती ने बगावत करने वाले सातों विधायकों को पार्टी से निलंबित कर दिया है। आपको बता दें कि बुधवार को बीएसपी के सात विधायकों असमल चौधरी, असलम राइनी, मोहम्मद मुज्तबा सिद्दीकी, हाकिल लाल बिंद, हरगोविंद भार्गव, सुषमा पटेल और वंदना सिंह ने पार्टी के खिलाफ बगावत करते हुए सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुलाकात की थी, जिसके बाद इनके सपा में शामिल होने के कयास लगाए जाने लगे।

राज्यसभा चुनाव को लेकर सपा के पैंतरेबाजी से आहत मायावती ने कहा कि लोकसभा चुनाव के दौरान उन्होंने सांप्रदायिक ताकतों से लड़ने के लिए सपा से हाथ मिलाया था, लेकिन मुलायाम परिवार की लड़ाई की वजह से वो गठबंधन का ज्यादा लाभ नहीं ले पाए। उन्होंने चुनावों के बाद से हमें जवाब देना बंद कर दिया, जिस वजह से हमने अब अकेले आगे बढ़ने का फैसला लिया है। बाद में जब लोकसभा चुनाव खत्म हो गए और हमने सपा का व्यवहार देखा तो हमें अपनी गलती का अहसास हुआ।

मायावती का कहना है कि उन्हें 2 जून 1995 (गेस्ट हाउस कांड) का केस वापस नहीं लेना चाहिए था। ये उनकी एक बड़ी गलती थी। इसके अलावा उन्हें सपा से भी हाथ नहीं मिलाना चाहिए था। हमने तय किया है कि भविष्य में यूपी में होने वाले एमएलसी चुनाव में सपा उम्मीदवारों को हराने के लिए, हम अपनी सारी ताकत लगा देंगे। अगर जरूरत पड़ी तो हम भाजपा का भी साथ लेंगे। सपा पर झूठा हलफनामा दायर करने का भी आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि राज्यसभा चुनाव के लिए उनकी रामगोपाल यादव से बात हुई थीइसी के बाद बसपा ने रामजी गौतम को उतारा। 

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