शहीद प्रशांत की मौत से टूटे पिता, पांच साल से पहले ही कश्मीर में पोस्टिंग पर पर उठाये सवाल

रूंधे गले से शीशपाल ने कहा कि आर्मी में किसी की नहीं चलती। सरकार भी कुछ नहीं कर सकती है। मेरे बेटे की पोस्टिंग नियम विरु( जम्मू कश्मीर में कर दी गयी।

Update: 2020-08-30 10:08 GMT

मुजफ्फरनगर। शहीद प्रशांत शर्मा की शहादत पर जनपद में गम का माहौल है। इस परिवार के साथ पूरी सरकार आज अंतिम संस्कार में खड़ी नजर आयी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शहीद के परिवार के लिए सुविधाओं की सौगात देने में देर नहीं की, लेकिन अपने युवा बेटे की मौत पर टूटते पिता ने सेना में पोस्टिंग की व्यवस्था को ही कठघरे में खड़ा करने का काम करते हुए बड़े गंभीर आरोप लगाये हैं। प्रशांत के पिता ने सबसे बड़ा सवाल यही किया है कि तीन साल की सर्विस में ही प्रशांत की पोस्टिंग कश्मीर जैसे तनावग्रस्त क्षेत्र में कर दी गयी। उन्होंने कई अन्य सवाल खड़े करते हुए जांच की मांग की।

कश्मीर के पुलवामा में आतंकवादियों से मुठभेड़ में शहीद हुए प्रशांत शर्मा के पिता शीशपाल शर्मा रिटायर्ड फौजी हैं। उन्होंने आज प्रशांत के अंतिम संस्कार के बाद श्मशान घाट पर ही मीडिया कर्मियों से बात करते हुए अपनी पीड़ा को सामने रखा। रूंधे गले से शीशपाल ने कहा कि आर्मी में किसी की नहीं चलती। सरकार भी कुछ नहीं कर सकती है। मेरे बेटे की पोस्टिंग नियम विरु( जम्मू कश्मीर में कर दी गयी। जबकि खुद आर्मी का ही नियम है कि किसी भी सैन्य कर्मी की कश्मीर घाटी में पोस्टिंग पांच साल की सर्विस पूर्ण किये बिना नहीं की जा सकती है। प्रशांत को आर्मी में भर्ती हुए तीन साल ही हुए हैं। ऐसे में आखिर किन कारणों से उसकी पोस्टिंग कश्मीर में की गयी। शीशपाल ने कहा कि मैं आर्मी को लेकर ज्यादा कुछ नहीं कह सकता, लेकिन मैंने भी आर्मी में 20 साल की सर्विस की है और आर्मी की व्यवस्था से भली प्रकार परिचित हूं।


शीशपाल ने कहा कि प्रशांत की पोस्टिंग आर्मी रूल के हिसाब से नहीं की गई। वह एक स्पोट्र्स मैन था। सेना की राष्ट्रीय राइफल्स में उसकी तैनाती कैसे और क्यों की गयी यह जांच का विषय है। शीशपाल ने मीडिया को बताया कि नवम्बर 2017 में स्पोट्र्स कोटे के अन्तर्गत प्रशांत शर्मा की आर्मी में भर्ती हुई थी। उसकी पहली पोस्टिंग महाराष्ट्र में हुई और वहां पर सेना के कोच सोहनवीर सिंह से उसका विवाद हो गया था। मामला रिश्वत मांगने का था। इसकी शिकायत प्रशांत ने की तो कार्यवाही करने के बजाये उसको महाराष्ट्र से राजस्थान भेज दिया गया। शीशपाल ने कहा कि उनको लगता है कि राजस्थान से प्रशांत की पोस्टिंग राष्ट्रीय राइफल्स में सोहनवीर के साथ पैदा हुई रंजिश के तहत ही जम्मू कश्मीर में कर दी गयी। शीशपाल ने मीडिया कर्मियों से कहा कि वह इस शिकायत को यहां आये सैन्य अफसरों के सामने रखना चाहता है। सरकार से उनको कोई उम्मीद नहीं है। उन्होंने कहा कि इस मामले की सेना में विभागीय जांच कराई जानी चाहिए। वह प्रशांत की पोस्टिंग को लेकर आशंकित हैं, कई सवाल मन में उठ रहे हैं कि आर्मी रूल के विपरीत तीन साल पूरे होने से पहले ही प्रशंात को वहां तैनाती क्यों दी गयी। शहीद प्रशांत के पिता के यह सवाल खड़े करने पर एक नई हलचल मच गयी है।

बता दें कि शहीद प्रशांत की भर्ती 2017 में हुई थी और इस तरह से उसको अभी भर्ती के तीन साल भी पूरे नहीं हुए हैं। जम्मू कश्मीर तनावग्रस्त क्षेत्र हैं और आर्मी रूल के अनुसार ऐसे क्षेत्र में किसी भी सैन्य कर्मी को पांच साल की सर्विस के बाद ही तैनात किया जा सकता है। प्रशांत भारतीय सेना की राष्ट्रीय राइफल्स की 50वीं बटालियन में तैनात था। प्रशांत के पिता मूल रूप से बागपत के गांव बिजरौल के निवासी हैं, करीब 15 साल पहले वह अपने तीन भाईयों ब्रजपाल सिंह, रामपाल शर्मा औ राजपाल शर्मा के साथ बुढ़ाना मोड पर आकर बस गये थे। प्रशांत का जन्म बिजरौल में ही हुआ था। प्रशांत चै. छोटूराम इण्टर काॅलेज का छात्र रहा। शीशपाल 2003 में सेना से नायक पद से रिटायर्ड हुए और आज वह नरा बिजलीघर पर सिक्युरिटी गार्ड की नौकरी कर रहे हैं। प्रशांत के यूं अल्पायु में ही दुनिया से चले जाने के कारण उसकी मां रीता शर्मा, बहन प्रियंका और भाई निशांत शर्मा का रो रोकर बुरा हाल हैं। प्रशांत अपने भाई को अफसर बनने के लिए प्रेरित करता रहता था। 15 फरवरी को वह एक माह की छुट्टी आया था और इसके बाद उसके लौटने की आस अब आस ही बनकर रह गयी है। प्रशांत की शहादत का गम उसके पैतृक गांव बिजरौल के साथ ही मेरठ के गांव अरनावली में भी है। अरनावली में उसकी शादी तय हुई थी।  

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